डेढ़ दशक में जम्मू में रोहिंग्याओं की संख्या दो सौ से बढ़कर 11 हजार हो गई है। इनको साजिश के तहत जम्मू में बसाया गया है। जम्मू की जनसांख्यिकी बदलने की साजिश में शामिल कश्मीर के चार एनजीओ की पुलिस ने पहचान की है।
पूर्व बिग्रेडियर विजय सागर का कहना है कि कश्मीर स्तरीय राजनीतिक दल जम्मू में अपना जनाधार बढ़ाना चाहते थे। एक समुदाय विशेष के बीच ये संदेश देना चाहते थे कि वे उनकी हितैषी हैं। शुरुआत में ध्यान दिया गया होता तो रोहिंग्याओं को वापस भेजने में परेशानी न होती। अब अपराध, देह व्यापार, नशा तस्करी, आतंकवाद व चोरी जैसी वारदातें बढ़ीं तो इनकी वापसी के लिए हल्ला होने लगा है।
सईद हुसैन था पहला रोहिंग्या
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2009 में प्रदेश में नेकां-कांग्रेस की सरकार के दौरान रोहिंग्याओं का जम्मू में आना शुरू हुआ था। सईद हुसैन (60) पहला रोहिंग्या था, जो जम्मू के बठिंडी में बसा और अभी भी वहां रह रहा है। इसके बाद यह सिलसिला चल निकला। रोहिंग्या आते गए और शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में रहने लगे। वर्ष 2012 में इन्हें तत्कालीन सरकार ने बठिंडी में एक जगह बसाया। इनके आधार कार्ड, राशन तक बने। इनके आने पर रोक नहीं लगी। नतीजा 2008 में ये 200 थे, जो अब 11 हजार हैं।
'ये लोग म्यांमार से आए हैं'
पूर्व ब्रिगेडियर का ये भी कहना है कि ये लोग म्यांमार से आए हैं, जिन्होंने अपने देश में ही समस्याएं पैदा कीं। वहां की सेना ने इन्हें भगाया तो ये बांग्लादेश बार्डर पहुंचे। यहां से इनको साजिश के तहत पश्चिम बंगाल से श्रीनगर की जगह जम्मू में बसाया गया, ताकि जम्मू की जनसांख्यिकी बदली जा सके। अब शहर के पाश क्षेत्र गांधी नगर में चोरियां, नशा जैसे अपराध बढ़े हैं तो याद आई कि रोहिंग्या चुनौती बन रहे हैं।
कश्मीरी सियासतदानों ने बसाया
वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुर शर्मा ने बताया कि कश्मीरी सियासतदानों ने जम्मू की जनसांख्यिकी बदलने व सियासी लाभ के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा ताक पर रखकर इन्हें जम्मू में बसाया। ये अब जिहादी नेटवर्क चला रहे हैं। आतंकी वारदातों, देह व्यापार, नशा तस्करी में शामिल हैं। युवतियां म्यांमार से भी लाकर जम्मू-श्रीनगर में बेची जा रही हैं।
अमेरिका की तरह कार्रवाई हो
पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने बताया कि देश के लिए खतरा बने रोहिंग्याओं को वापस भेजना चाहिए। ये शादियां जम्मू में कर रहे हैं। लंबे समय तक बसने के लिए ऐसा किया जा रहा है। भारत को अमेरिका की तरह कार्रवाई करनी चाहिए। रोहिंग्या पैसे के लिए कुछ भी कर सकते हैं। इनको तस्करी, आतंकी हमलों में इस्तेमाल किया जा रहा है।
पांच वर्ष में 65 मामले दर्ज
जानकारी के अनुसार, जम्मू जिले में अलग-अलग थानों में रोहिंग्याओं के खिलाफ चोरियों, देह व्यापार, मानव तस्करी, नशा तस्करी जैसे मामलों में 65 मामले दर्ज हो चुके हैं। पुलिस के पास ऐसी जानकारी भी है कि ये लोग आतंकियों तक के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।