किश्तवाड़ हिंसा के दौरान मारे गए अरविंद राज भगत के पिता देस राज भगत ने किश्तवाड़ हिंसा के दौरान लूटपाट, संपत्ति को नुकसान, आगजनी, एक समुदाय के लोगों की दुकानों को नुकसान और मासूम लोगों की मौत मामले में दर्ज एफआईआर की जांच सीबीआई से कराने की हाईकोर्ट में याचिका पेश की है।
न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह ने एडवोकेट सुनील सेठी, परीमोक्ष सेठ की दलीलों पर पूर्व राज्य गृह मंत्री और मौजूदा विधायक सज्जाद अहमद किचलू, गृह विभाग के प्रधान सचिव, किश्तवाड़ के डिप्टी कमिश्नर, एसएचओ किश्तवाड़, तत्कालीन डीसी किश्तवाड़ मोहम्मद सलीम, डीआईजी डोडा रामबन रेंज अशकूर वानी, तत्कालीन एसएसपी किश्तवाड़ सुनील गुप्ता को नोटिस जारी किया।
हाईकोर्ट ने डीसी किश्तवाड़ को अब तक हुई जांच रिपोर्ट को पेश करने और इस पर निजी हलफनामा पेश करने के भी आदेश दिए। याचिका के अनुसार याची सेना से रिटायर्ड सूबेदार है।
उसके बेटे अरविंद राज को कुलीद चौक पर 9 अगस्त 2013 को 17 गोलियां लगीं। सांप्रदायिक हिंसा के दौरान चली इन गोलियों का मामला किश्तवाड़ पुलिस थाने में दर्ज है।
ईद के दिन हुई सांप्रदायिक हिंसा को पूरे किश्तवाड़ ने झेला। ईद के कुछ दिन पहले ही भारत विरोधी पोस्टर कसबे में लगाए गए थे। आतंकी मकबूल भट और अफजल गुरु के पोस्टरों को जगह-जगह लगाया गया था।
इसके कारण राष्ट्रवादी लोगों में सांप्रदायिकता और देश विरोधी भावनाओं का फैलाया गया। किश्तवाड़ के लोग मुस्तैद हो गए।
राष्ट्र विरोधी पोस्टरों को किश्तवाड़ की हर इमारत विशेषकर मस्जिद के बाहर चिपकाने की रिपोर्ट भी दी गई थी। जिला और पुलिस प्रशासन ने रिपोर्ट के बाद भी 9 अगस्त 2013 को ईद के दिन कोई एहतियात नहीं बरती।
ईद की नमाज खत्म होने के बाद ही पाकिस्तान, आतंकी और आतंकवाद समर्थन में नारे लगने लगे। सिविल और पुलिस प्रशासन की ओर से भी कार्रवाई नहीं हुई। शांतिपूर्वक माहौल को बिगाड़ा गया और लूटपाट शुरू हो गई।
लोगों की नाराजगी इसलिए भी है कि गृह राज्य मंत्री सज्जाद अहमद किचलू मौके पर मौजूद थे। डीसी और एसएसपी गेस्ट हाउस में चले गए। किसी भी फोर्स ने शाम तक कोई भी कार्रवाई नहीं की। सरकारी मशीनरी ने उपद्रवियों को खुला हाथ दिया और लूटपाट, आगजनी होती रही।