जम्मू कश्मीर में अब 18 साल के लड़के और 15 साल की लड़की (दोनों हिंदू) का विवाह नहीं हो सकेगा। विवाह के लिए अब लड़के की उम्र 21 साल और लड़की की उम्र 18 साल होना जरूरी होगी।
शुक्रवार को विधानसभा में इस व्यवस्था को कायम करने से संबंधित जम्मू कश्मीर हिंदू मैरिज एक्ट, 1980 संशोधन विधेयक को मंजूरी मिल गई। इसी प्रकार जम्मू कश्मीर क्रिश्चियन मैरिज एंड डायवोर्स एक्ट 1957 में भी संशोधन किया गया है।
इस संशोधन विधेयक के पारित होने के साथ विवाह का पंजीकरण कराना भी अनिवार्य हो गया है।
हिंदू मैरिज एक्ट के सेक्शन आठ की सब सेक्शन दो में संशोधन कर पंजीकरण नहीं कराने की सूरत में जुर्माने की राशि पच्चीस रुपये से बढ़ाकर पांच सौ रुपये कर दी गई है। विवाह के बाद अब अपील करने का समय तीस दिन से बढ़ाकर नब्बे दिन कर दिया गया है।
राज्य के कानून और विधायी कार्य मंत्री मीर सैफउल्लाह ने उक्त विधेयक को मंजूर करने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव रखा था। इस पर पैंथर्स विधायक हर्ष देव सिंह ने कुछ खामियों को उजागर किया।
इसके जवाब में कानून मंत्री ने कहा कि इसके रूल भी बनाए जा रहे हैं, उनमें कोई खामी नहीं रहेगी।
कानून मंत्री ने इस विधेयक को पारित करने का कारण सुप्रीम कोर्ट की हिदायत बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने सिविल याचिका 291/2005 सीमा बनाम अश्विनी कुमार मामले में व्यवस्था दी है कि देश के हर धर्म के नागरिकों की शादी का पंजीकरण अनिवार्य बनाया जाए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को कानून और नियम बनाने की के लिए कहा था।