भाजपा के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी ने बयान दिया था कि वह 'हिंदू राष्ट्रवादी' हैं। इस टिप्पणी पर काफी विवाद पैदा हो गया था।
लेकिन जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय का कहना है कि जो भी व्यक्ति किसी तरह के धार्मिक राष्ट्रवाद से जुड़े होने का दावा करता है, उसके चुनाव लड़ने पर रोक लगा देनी चाहिए।
न्यायमूर्ति मुजफ्फर हुसैन अतर ने कहा, "हमारी संवैधानिक व्यवस्था के मुताबिक भारतीय, केवल भारतीय होता है। कोई भी व्यक्ति हिंदू राष्ट्रवादी, मुस्लिम राष्ट्रवादी, सिख राष्ट्रवादी, बौद्ध राष्ट्रवादी या ईसाई राष्ट्रवादी नहीं हो सकता।"
केंद्र, चुनाव आयोग को निर्देश
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निर्देश दिए हैं कि धार्मिक राष्ट्रवाद फैलाकर चुनाव में जनता का जनादेश हासिल करने का प्रयास करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
ताकि देश के संविधान को आघात पहुंचाने से बचाया जा सके। अदालत ने कहा कि हमारे संवैधानिक दर्शन में एक ही ‘वाद’ है और वह है ‘भारतीयता वाद।’ अन्य सभी वाद भारतीयता वाद के दुश्मन हैं।
धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की मांग को लेकर कश्मीरी पंडितों की ओर से दायर एक याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस अतर ने कहा कि भारत का संविधान हमें धर्म और आस्था जैसे दावे के अधिकार की गारंटी देता है।
लोगों को बांटना गलत
उन्होंने कहा कि इसलिए भारत के संविधान की प्रस्तावना की अभिव्यक्ति में ‘धर्मनिरपेक्षता’ लाने की कोई आवश्यकता नहीं है।
जस्टिस ने कहा, "यह अभिव्यक्ति देश की आबादी के एक बड़े वर्ग की तीखी प्रतिक्रिया के रूप में उभरती है और देश के लोगों को अलग-अलग वाद में बांटती है। हमारा राष्ट्र हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई या बौद्ध भारत नहीं है। लाखों लोगों के संघर्ष और कुर्बानियों से भारत देश पैदा हुआ है।"
अदालत ने केंद्र सरकार और संवैधानिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि देश के संविधान को ठेस पहुंचाने का प्रयास करने वाले किसी भी शख्स को न सिर्फ रोका जाए, बल्कि उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाए।