पांच फरवरी 2021 को दर्ज किया था मामला
जांच एजेंसी ने पिछले साल पांच फरवरी को स्वत: संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया था। यह मामला जेईआई सदस्यों की गतिविधियों से संबंधित है। आरोप है कि 'जकात, माउदा और बैत-उल-मल' के रूप में दान के माध्यम से घरेलू और विदेश से धन एकत्र किया जा रहा था। दान और अन्य कल्याणकारी गतिविधियों के लिए एकत्रित धन का उपयोग हिंसा और अलगाववादी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
एनआईए के अनुसार, जेईआई द्वारा जुटाई जा रही धनराशि को जेईआई कैडरों के व्यवस्थित नेटवर्क के माध्यम से प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों जैसे हिज्ब-उल-मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा और अन्य को दिया जाता है।
फरवरी 2019 में, केंद्र ने आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत जेईआई पर पांच साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था। बताया गया कि यह आतंकवादी संगठनों के साथ 'निकट संपर्क' में था और जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में जुटा था। प्रतिबंध के बाद जम्मू-कश्मीर में एक बड़ी कार्रवाई में सैकड़ों जेईआई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था।