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लेबर कार्ड के नवीनीकरण के लिए मजदूर हो रहे परेशान

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लेबर कार्ड का नवीनीकरण करवाने के लिए श्रम कार्यालय के खुलने का इंतजार करते मजदूर। संवाद - फोटो : KATHUA
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कठुआ। असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए बनाए गए लेबर कार्ड उनके लिए अब परेशानी का सबब बन रहे हैं। जिला में श्रम विभाग की ओर से पंजीकृत करीब 10 हजार मजदूरों को पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए दरबदर होना पड़ रहा है। सुबह से ही जिला श्रम कार्यालय पर मजदूर जमा होते हैं। मजूदरों में उनके लेबर कार्ड के नवीनीकरण जटिल प्रक्रिया से लगातार रोष बढ़ रहा है। बुधवार की सुबह कड़ाके की ठंड में अपने लेबर कार्ड का नवीनीकरण करवाने जिला श्रम कार्यालय में पहुंचे मजदूरों में विभाग के कर्मचारियों के असहयोगात्मक रवैए पर रोष जताते हुए प्रशासन से व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग की।
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मजदूरों ने बताया कि कई बार तो व्यवस्था के अभाव में उन्हें कई कई दिन कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। नतीजा यह है कि मजदूरों की कई दिहाड़ियां भी श्रम कार्यालय के चक्कर लगाते टूट जाती हैं।
प्रहलाद, जखबड़ बिग्वां ने बताया कि श्रम विभाग की ओर से निशुल्क लेबर कार्ड बनवाने के बाद मजदूर को बिना किसी अंशदान के दुर्घटना बीमा के साथ उनके दो बच्चों को छात्रवृत्ति, असाध्य रोगों से ग्रसित होने पर पूर्ण चिकित्सीय खर्च के साथ कई अन्य सुविधाएं सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जाती है। लेकिन यह तभी संभव है जब उनके लेबर कार्ड का नवीनीकरण हो पाए। पांच दिन से लगातार चक्कर लगाने के बाद भी कभी बिजली बंद, कभी पोर्टल बंद, कभी इंटरनेट बंद जैसी समस्या के कारण अभी तक कार्ड का नवीनीकरण नही हुआ।
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रामपाल, सपालमा हीरानगर ने बताया कि सुबह पांच बजे कड़ाके की ठंड के बावजूद घर से निकलकर श्रम कार्यालय पहुंचने के बाद भी लेबर कार्ड का नवीनीकरण न हो पाना मजदूरों को निराश कर रहा है। सैकड़ों मजदूरों के कार्यालय के गेट पर खड़े होने के बावजूद सुबह 10 बजकर 20 मिनट तक कार्यालय का मुख्य गेट भी नही खुला है। ऐसे में नवीनीकरण के निर्धारित समय सीमा 31 दिसंबर तक सभी मजदूरों के लेबर कार्ड का नवीनीकरण की उम्मीद भी बेमानी है।
बृजनेश कुमारी, सहायक श्रम आयुक्त ने कहा कि लेबर कार्ड का नवीनीकरण किसी भी इंटरनेट कैफे के माध्यम से मजदूर स्वयं करवा सकते हैं लेकिन बार-बार बताने के बावजूद वह इसे करवाने के लिए कार्यालय आ जाते है। कार्यालय में इतने कर्मचारी नही है कि वह हर मजदूर की एक-एक समस्या का समाधान कर सकें। मजदूरों को इसके लिए खुद जागरूक होना होगा। अगर कोई समस्या है तभी वी उनके कार्यालय आए।
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