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BACK TO VILLAGE/ दो बार कार्यक्रम में लगाई गुहार, फिर भी लोग तालाब का पानी पीने को मजबूर

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हीरानगर। सरकार ने बैक-टू-विलेज कार्यक्रम शुरू किया था, ताकि लोगों की मूल समस्याओं को जान सकें। उनका निदान कर सकें। बैक-टू-विलेज के पूर्व में दो चरण हुए। कई अधिकारी गांवों पहुंचे। रातें गुजारीं। पंचायत प्रतिनिधियों और लोगों से भी मिले। उनसे गांवों की समस्याएं जानीं और फिर समाधान करने का आश्वासन दिया। मगर समस्याओं का हल सिर्फ आश्वासन ही रहा। यह हकीकत का रूप नहीं ले पाए। कुछ ऐसा ही हुआ हीरानगर उपमंडल के कंडी क्षेत्र की पंचायत डिंगा अंब-बी के साथ।
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स्थानीय सरपंच के अनुसार पंचायत के सात वार्डों में रहने वाली 3000 आबादी में से 60 फीसदी आबादी ऐसी है, जो तालाब और नदी-नालों का पानी पीने को मजबूर है। पहले चरण में पहुंचे अधिकारी के समक्ष पंचायत के लोगों ने पानी की समस्या उठाई। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द इसका समाधान किया जाएगा। मगर नहीं हुआ। इसके बाद 25 नवंबर 2019 से शुरू हुए बैक-टू-विलेज के दूसरे चरण में भी अधिकारी पहुंचे। उनके समक्ष भी यह समस्या उठाई गई, लेकिन फिर भी समस्या का समाधान नहीं हो पाया।
आज भी डिंगा अंब-बी पंचायत की 60 फीसदी आबादी नदी-नालों और तालाबों का पानी पीने को मजबूर है। इसके अलावा भी अन्य पंचायतों के लोगों ने अपनी समस्याएं पहले दो चरणों में अधिकारियों के समक्ष उठाई थीं, लेकिन कोई समाधान नहीं हो पाया। ऐसे में अब लोग बैक-टू-विलेज चरण-तीन को लेकर भी नाखुश हैं। कहते हैं कि पूर्व के दो चरणों में उठाई समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो अब तीसरे चरण का क्या फायदा?
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डिंगा अंब-बी पंचायत के सरपंच सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि बैक-टू-विलेज चरण-1 और 2 में पंचायत में पीने की पानी की समस्या अधिकारियों के समक्ष उठाई थी। लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। कई बार जल शक्ति विभाग के अधिकारियों से पंचायत में पेयजल समस्या के समाधान करने गुहार लगाई, लेकिन कोई हल नहीं हुआ। आज भी डींगा अंब-बी पंचायत के 60 फीसदी लोग तालाबों का पानी पी रहे हैं। हमारे लिए बैक-टू-विलेज कोई मायने नहीं रखता। हमने पहले ही इसका बहिष्कार कर दिया है।
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