- सेवा परियोजना में बीते साल के मुकाबले आधा भी नहीं रहा उत्पादन, तीन में एक ही टरबाइन चल पा रही
संवाद न्यूज एजेंसी
बारिश के अभाव में कठुआ के पहाड़ी इलाकों में बिजली और पेयजल संकट गहरा गया है। बनी सब डिवीजन में सेवा परियोजना में जहां तीन में एक ही टरबाइन चल पा रही है वहीं रंजीत सागर बांध की स्थिति भी कुछ ऐसी है।
लगातार कम हो रहे जलस्तर के बीच इस परियोजना में भी एक ही टरबाइन फिलहाल काम कर रही है। पहाड़ी इलाकों में कम बारिश से इन पनबिजली परियोजनाओं का जलस्तर गिरता जा रहा है। दरअसल बनी सब डिवीजन में सेवा परियोजना के कैचमेंट क्षेत्र में बीते साल अक्तूबर के बाद कोई भी अच्छी बारिश दर्ज नहीं की गई। बरसात के सीजन में भी इस साल बनी में बदरा कुछ खास नहीं बरसे। यही वजह है कि नौ मेगावॉट की सेवा जलविद्युत परियोजना में पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से केवल एक ही टरबाइन काम कर रही है। परियोजना को पीक समय पर कम से कम तीन घंटे के लिए अनिवार्य रूप से बिजली उत्पादन करना होता है। लेकिन परियोजना प्रबंधकों की मानें तो स्थिति ऐसी है कि एक टरबाइन बमुश्किल चल पा रही है।
सेवा बांध के जलाशय में डेढ़ क्यूसेक पानी का इनफ्लो दर्ज हो रहा है। ऐसे में परियोजना का जलस्तर बुरी तरह से गिरते हुए परियोजना चलाने के लिए न्यूनतम जलस्तर के एक मीटर के आसपास रह गया हे। आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई तो परियोजना में बिजली उत्पादन ठप हो सकता है। उधर, रंजीत सागर झील में बिजली उत्पादन के लिए केवल एक टरबाइन चल पा रही है। यहां जलाशय का जलस्तर घटने से बसोहली कस्बे के लिए जलसंकट बढ़ने के आसार बन रहे हैं। दरअसल झील के पानी को ट्रीट करने के लिए पानी की सप्लाई बसोहली कस्बे को होती है। जलस्तर कम होने से जल शक्ति विभाग भी पाइपों को बढ़ाने के काम में जुट गया है।
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सेवा परियोजना में बिजली उत्पादन (मिलियन यूनिट)
माह 2023-24 2024-25
जून 72.793 30.433
जुलाई 75.163 17.206
अगस्त 44.303 44.132
सितंबर 17.444 26.506
अक्तूबर 26.087 11.435
नवंबर 14.329 6.965
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न हुई बारिश तो साल की शुरुआत में ही गहराएगा जलसंकट
जिले में बारिश काफी कम होना, अच्छे संकेत नहीं दे रहा है। इस साल गर्मी का रिकार्ड, अधिकतम तापमान, फरवरी महीने से तापमान सामान्य से ऊपर जाना और समय से पहले फसलों का पकना, मौसम के बिगड़ते मिजाज भी यही इंगित करता है। विशेषज्ञों की मानें तो इस बार 80 दिन के लगभग बीतने के बाद भी सूखा चल रहा है। इससे फसलों को तो नुकसान है ही, इसका प्रभाव पर्यावरण पर भी पड़ना तय है। ऐसी स्थिति रही तो गर्मी के सीजन से पहले ही कई इलाकों में जलसंकट गहराएगा।
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परियोजना के कैचमेंट क्षेत्रों में पिछले एक साल से अच्छी बारिश नहीं हुई है। एक महीने से अधिक समय से एक ही टरबाइन चल रही है। जलस्तर कम होने से पीक समय पर भी बिजली उत्पादन चुनौती बना हुआ है। परियोजना के बांध में जलस्तर न्यूनतम के काफी करीब पहुंच चुका है।
- मदन लाल, परियोजना प्रमुख, सेवा जलविद्युत परियोजना