कठुआ। बहुप्रतीक्षित ओल्ड सांबा-कठुआ मार्ग पर उज्ज दरिया पर बने करीब एक किलोमीटर लंबे पुल की आखिरकार सीमावर्ती जनता को सौगात मिल गई। केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को बीआरओ की ओर से निर्मित देश के सबसे लंबे पंडोरी पुल का उद्घाटन किया। इस मौके पर उन्होंने पुल को सीमावर्ती लोगों के लिए सौगात बताते हुए कहा कि इसके निर्माण से जहां पुराने मार्ग को दोबारा पहचान मिलेगी, क्षेत्रवासियों की भी कई परेशानियां दूर हो जाएंगी। इसके अलावा आपात स्थिति में सीमा प्रहरियों व सुरक्षाबलों के साथ साथ पुलिस के लिए भी पुल फायदेमंद रहेगा।
पंडोरी में समारोह स्थल पर दोपहर करीब ढाई बजे सेना के हेलीकाप्टर से पहुंचे केंद्रीय रक्षामंत्री ने पुल का लोकार्पण किया। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सीमावर्ती लोग किस प्रकार अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करते हैं, यह बात दूरदराज के लोगों को शायद अंदाजा भी न हो लेकिन वो भली भांति परिचित है। सेना, आईबी, पुलिस, बीएसएफ, सीमा की सुरक्षा का निर्वाह करते हैं। मगर सीमावर्ती ग्रामीणों को रणनीतिक धरोहर कहा जाए तो दो राय नहीं होगी। विडंबना की बात है कि स्वतंत्रता के बाद जिस तरह से सीमावर्ती इलाकों का विकास होना चाहिए था वैसे नहीं हो पाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार आने के बाद भरपूर कोशिश रही कि इन इलाकों का विकास किया जाए। इसी कड़ी में शनिवार को उज्ज और बसंतर पर बने दो पुलों का लोकापर्ण हुआ है। बीआरओ की ओर से बनाए गए एक हजार मीटर लंबे देश के पहले पुल के लिए अधिकारियों और टीम की भी पीठ पथपथाई। इस मौके पर केंद्रीय पीएमओ राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, सेना प्रमुख बिपिन रावत, बीआरओ डीजी हरपाल सिंह और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री राजीव जसरोटिया भी मौजूद रहे।
मोदी सरकार गांव-कस्बों को जोर रही शहरों से
केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पुल की कमी हो या फिर सड़क की लोगों को कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। पुल न हो तो तीन चार फर्लांग की दूरी भी चार पांच किलोमीटर बन जाती है। यह पुल है सीमावर्ती लोगों को समस्या निजात दिलाकर दूरियां कम करेगा। सुरक्षा की दृष्टि से भी सेना के सुरक्षा के जवान पुल बनने के कारण आसानी से मूवमेंट कर सकते हैं। जिला की कानून व्यवस्था में भी अहम रोल निभाएगा। बीआरओ 12 और पुल बनाने जा रही है।
रक्षामंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने गांव को सड़कों के साथ जोड़ने का काम शुरू किया था और अब मोदी सरकार गांव के साथ-साथ कस्बों को शहरों से जोड़ रही है। क्योंकि सरकार और प्रधानमंत्री का मानना है कि देश का विकास तभी होता है जब वहां की सड़कें अच्छी हों।
पांच साल में विकास का मॉडल बन उभरा है कठुआ
केंद्रीय पीएमओ राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उज्ज पुल के लोकार्पण समारोह के दौरान संबोधित करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में कठुआ विकास का मॉडल बन उभरा है। यहां हर दो किलोमीटर पर विकास के निशान मौजूद हैं। केंद्रीय रक्षामंत्री को बताया कि यह शहीदों, शूरवीरों की धरती है। इत्तेफाक से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की बलिदान भूमि भी है। कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधि होने के चलते जब भी इलाके की मांगें उनके आगे रखी गईं तो हमेशा पूरी ही हुई हैं। आईबी के लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मगर वह सुरक्षा दीवार की भांति डटे हुए हैं। जब भी गोलीबारी या कोई आपदा हुई तो आपको साथ खड़ा पाया। कहा कि सीमावर्ती इलाकों के लिए बंकरों की मांग की गई तो सामुदायिक और व्यक्तिगत बंकर मिले जिनका काम जारी है। सीमा भवन दिए, एसपीओ का वेतन तीन से चार हजार कर दिया, वीडीसी का शक्तिकरण हुआ। पशुओं का बीमा, मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे में वृद्धि की गई। अंतरराष्ट्रीय सीमा के लोगों को तीन प्रतिशत आरक्षण दिया गया। सीमावर्ती इलाकों में दूरदर्शन के डीटीएच बांटे जा रहे हैं। इससे साफ है कि केंद्र सरकार सीमा पर रहने वाले लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।
सुरक्षा रही चाकचौबंद
बीआरओ द्वारा निर्मित पंडोरी स्थित उज्ज पुल के लोकार्पण के लिए आयोजित कार्यक्रम के दौरान सुुरक्षा व्यवस्था चाकचौबंद रही। इस दौरान क्षेत्र की तमाम जगहों को सील किया गया था। जगह जगह मेटल डिटेक्टर लगाकर कार्यक्रम में आने वाले हरेक व्यक्ति की गहनता से जांच की जा रही थी। पुल के लोकार्पण स्थल पर आम लोगों के आने जाने पर पूर्णतया प्रतिबंध रहा। पूरी तरह से चौकन्नी सुरक्षा एजेंसियों ने पुल के दोनों तरफ बैरिकेड लगाकर आवाजाही को बंद रखा था। वहीं ट्रैफिक पुलिस ने मार्ग से आने जाने वालों पर पैनी नजर बनाए रखी। हालांकि पुख्ता सुरक्षा के चलते लोगों को परेशानी भी हुई। और लोगों को पुल पर आवाजाही बंद होने के कारण पुल पार के लोगों को कार्यक्रम में पंहुंचने को कई किलोमीटर रास्ता तय कर आना पड़ा।
उत्साह के आगे उमस भरी गर्मी भी हुई पस्त
रक्षामंत्री को देखने भर के लिए हजारों की तादाद में उमड़े लोगों की वजह कार्यक्रम के लिए किए गए इंतजाम भी नाकाफी साबित हुए। लोगों के बैठने को लगाए गए पंडाल में जगह कम पड़ने के कारण लोग पंडाल के बाहर ही कड़ी धूप में डटे रहे और रक्षामंत्री को सुनकर ही वहां से गए। भीड़ इतनी ज्यादा था कि एकबारगी रक्षामंत्री को भी बोलना पड़ा कि उन्होंने बीआरओ के कार्यक्रम में इतने लोगों के आने की अपेक्षा नहीं की थी। उन्होंने लोगों को उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए उनका अभिनंदन किया।