- अंतिम चरण में पहुंचा 14 किलोमीटर लंबी सड़क पर आखिरी काजवे का काम
- भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे 15 सीमावर्ती पंचायत को मिलेगी बेहतर सुविधा
हीरानगर। इस बरसात से पहले जीरो लाइन पर लोगों को बेहतर सड़क सुविधा मिलने जा रही है। सड़क के बनते ही लोगों का सफर सुगम हो जाएगा। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों को बेहतर सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए करोल कृष्णा से छन्न लाल दीन तक बनाई जा रही सड़क पर आखिरी काजवे का काम सुचारु रूप से चल रहा है।
जानकारी के अनुसार इस बरसात से पहले करोल में बनाए जा रहे काजवे का काम पूरा हो जाएगा। हालांकि सड़क का काम लगभग पूरा हो चुका है और तारकोल भी बिछाया जा चुका है। मगर सिर्फ एक आखिरी काजवे का काम पूरा नहीं होने के कारण लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल लोगों के आने-जाने के लिए अस्थायी तौर पर कच्चा रास्ता बनाया गया है। यहां से गुजरते वाहन चालकों को धूल मिट्टी का सामना तो करना ही पड़ता है, साथ ही कई बार निर्माण कार्य के चलते पानी गिरने से फिसलन बढ़ने से हादसे का डर बना रहता है। लोगों ने कहा कि अगर बरसात से पहले यह नहीं बना तो यहां से सड़क का संपर्क दोनों तरफ से कट जाएगा।
इस आखिरी काजवे का काम खत्म होते ही करीब 13 करोड़ की लागत से बनने वाली 14 किलोमीटर लंबी यह सड़क न सिर्फ लोगों को सुगम यात्रा का लाभ देगी, बल्कि यहां यातायात बढ़ने से 15 पंचायतों की सूरत भी बदलेगी। जीरो लाइन पर बन रही यह सड़क सीमावर्ती लोगों के लिए जितनी अहम है उतनी ही सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल के लिए भी है। संवाद
इस बरसात से पहले काजवे का काम पूरा हो जाएगा। फिलहाल दोनों तरफ एप्रोच बनाने का काम चल रहा है। इसे बनाने में हुई कुछ देरी का कारण यह भी है कि जहां यह बन रहा है वहां पानी का स्तर काफी ऊपर है। खोदाई के दौरान कई बार जलभराव होने से पानी सूखने तक का इंतजार करना पड़ता है। मगर अब लोगों को और इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
- चंगेज खान, एईई पीएमजीएसवाई