सत्र के दौरान योग का अभ्यास करतीं महिला प्रशिक्षु। संवाद
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कठुआ। आगामी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर होने वाले मुख्य कार्यक्रम से पूर्व योग को समर्पित 100 दिन मनाने के क्रम में सरदार पृथीनंदन सिंह पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में विशेष योग सत्र का आयोजन किया गया। आयुष निदेशक डॉ. मोहन सिंह के निर्देश और जिला आयुष अधिकारी डॉ. अजय कुमार टिक्कू के मार्गदर्शन में आयोजित सत्र के दौरान योग समन्वयक अंकुश मोदेल ने प्रशिक्षुओं को प्राणायाम और सूर्य नमस्कार जैसे सूक्ष्म व्यायाम का अभ्यास करवाया।
इस मौके पर विशेष रूप से मौजूद आयुष स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दीपक शर्मा ने पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षण हासिल करने वाले 300 प्रशिक्षुओं को योग और उसके लाभ की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वातावरण में बढ़ते प्रदूषण और खराब जीवन शैली के कारण कई बार हम ऐसे असाध्य रोगों का शिकार हो जाते हैं, जिसके उपचार के लिए काफी पैसा खर्च करने के बाद भी हम पूरी तरह से रोग मुक्त नहीं हो पाते है। उन्होंने कहा कि योग हमारे मन और दिमाग को शांत रखने, बीमारियों से बचाव करने, हमें ऊर्जावान और तरोताजा रखने, शरीर को लचीला बनाकर फिट रखने के साथ तनाव कम करने में सहायक सहायक है। नियमित रूप से किए जाने वाले योगाभ्यास से हम शुगर, ब्लड प्रेशर, हाइपर टेंशन जैसी बीमारियों से मुक्त हो जाते हैं। लिहाजा हमें इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा। इस मौके पर उन्होंने प्रशिक्षुओं की जांच के बाद उन्हें दवाएं भी वितरित की। इस मौके पर पुलिस ट्रेनिंग स्कूल के प्रधानाचार्य एसएसपी रूप राज, डीएसपी रघुबीर सिंह, इंस्पेक्टर संजीव शर्मा, इंस्पेक्टर राजेश बडियाल भी मौजूद थे।
साधना शिविर में पहुंचे लोग
बिलावर। सुकराला गांव के गुरु आश्रम में जारी सात दिवसीय साधना शिविर के तीसरे दिन कई लोगों ने हिस्सा लिया। संत सुभाष शास्त्री ने शिविर में पहुंचे लोगों को नाड़ी शोधक प्राणायाम के बारे में बताया और इस प्राणायाम के लाभ बताकर साधकों को अभ्यास कराया।
इस अवसर पर शिविर में पहुंचे साधकों को सुभाष शास्त्री ने कहा कि मन पांच ज्ञानेंद्रियों के कारण भ्रमित रहता है। असल में मनुष्य कहां है यह मन तुम्हें बताता है। मन के बिना तुम कहां हो? इसलिए देह, मन व इंद्रियों के कारण तुम्हें कहीं होने कहीं न होने का भ्रम पैदा हो जाता है। जबकि असल में मनुष्य का स्वरूप भ्रम चेतना में है। इसलिए असलियत को समझने का सरल और सबसे सुगम रास्ता ध्यान है। इसलिए इसका प्रत्येक दिन अभ्यास करना सबसे उत्तम माना गया है।