यूं तो सीमा का नाम आते ही गोलियों की थर्राहट और मोर्टार से क्षतिग्रस्त घर जेहन में आने लगते हैं, लेकिन आने वाले दिनों में सीमा का नजारा बदलने वाला है।
पर्यटन विभाग की नई कवायद में हीरानगर के सीमावर्ती इलाकों को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की दिशा में योजना बनाई जा रही है।
जम्मू के सुचेतगढ़ में कवायद को हरी झंडी मिलने के बाद से हीरानगर सेक्टर में इस तरह की मुहिम के परवान चढ़ने की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
सीमा पर व्यू प्वाइंट और स्थानीय व्यंजनों का लुत्फ लेने के साथ ही पर्यटकों को यहां की संस्कृति से भी अवगत करवाने की तैयारी की जा रही है।
पर्यटन विभाग बीएसएफ से इस संबंध में लगातार बैठक कर योजना तैयार करने में जुट गया है। सुरक्षित स्थानों से पर्यटकों को भारत-पाक सीमा का नजारा देखने को मिलेगा।
इसके साथ ही पर्यटकों के रात के ठहरने के बंदोबस्त और अन्य संभावनाओं पर भी तेजी से योजना बनाई जा रही है।
पिछले दिनों कठुआ दौरे पर आए मुख्यमंत्री जब हीरानगर और कठुआ के बीच हाईवे पर गुजर रहे थे तो उन्होंने भी इस संबंध में अधिकारियों से पूछा था कि यहां से सीमा कितनी दूरी पर है।
ऐसे में मात्र बीस किलोमीटर की दूरी पर हाईवे को देखते हुए उन्होंने पर्यटन विभाग को निर्देश दिए थे कि इस इलाके में पर्यटन की संभावनाओं को विकसित करने की दिशा में काम किया जाए।
ऐसे में यदि इसे लेकर पर्यटन विभाग की कवायद रंग लाती है तो न सिर्फ इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि सीमा पर प्रहरियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर रहने वाले ग्रामीणों का हौसला भी बढ़ेगा। विशेषज्ञों की मानें तो इससे सीमावर्ती इलाके में रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे।
पर्यटन विभाग, जम्मू के निदेशक आरके वर्मा ने कहा कि हीरानगर के सीमावर्ती इलाकों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभाग योजना पर काम कर रहा है। इसे लेकर लगातार बीएसएफ अधिकारियों के साथ बैठक की जा रही है। देशभर से आने वाले सैलानियों को सीमावर्ती इलाके की ओर आकर्षित करने की कोशिश जारी है।