कंडी क्षेत्रों में बंदरों के आतंक ने किसानों को खेती का तरीका बदलने पर मजबूर कर दिया है। हर बार सर्दी शुरू होने से पूर्व ही मक्की की फसल को तबाह करने पर उतारू बंदरों से परेशान किसानों ने खेती का तरीका बदलने का फैसला किया है।
गांव घाटी के किसान करतार सिंह ने बताया कि हर साल उन्हें बंदरों के आतंक से जूझना पड़ता है। इस साल भी बंदरों ने अध पकी मक्की की फसल पर हमला कर दिया और फसल को तबाह करना शुरू कर दिया। नतीजन किसानों ने वही अधपकी फसल ही काट ली है।
उसे अब पर चारे के रूप में बेच रहे हैं जिससे फसल को लगाने तक का पैसा भी वसूल नहीं हो पाएगा। इसके साथ ही हर बार के हमलों से अब परेशानी होनी लगी है। वहीं सिकान मोहिंदर सिंह, कृष्ण कुमार, मोहन सिंह, बिशंबर सिंह ने कहा कि विभाग को भी कई बार बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए कहा गया है लेकिन अभी तक कोई भी कार्रवाई नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि अब घाटी, पलैल और आसपास के किसानों ने फसल लगाने के तरीके को बदलने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि या तो मक्की की फसल लगाना बंद कर देंगे या फिर किसी अन्य तरीकों से वह बंदरों के आतंक को रोकेंगे। इसमें लाखों का खर्च आएगा और किसानों को कर्जदार होना पड़ सकता है। लिहाजा विभाग और प्रशासन को चाहिए कि किसानों की मदद करे।