आज भी गोली, कल भी गोली और हर समय गोली का डर सह सह के ही उम्र के नब्बे साल निकाल दिए साहब, अब समय है कि जल्द से जल्द स्थाई हल कर दिया जाए।
सीमांत गांव बोबिया के निवासी नेक सिंह ने एक बार पूछने पर अपना दर्द बयां कर दिया। विस्थापितों के लिए बनाया गए शिविर में हर किसी की जुबां पर एक ही बात है कि अब स्थायी हल चाहिए। बार बार पलायन से वे तंग आ गए हैं।
अमर उजाला से बातचीत के दौरान नेक सिंह कहा कि उन्होंने 1962,1965,1971,2002 और अब 2014 में पलायन किया है। इसके साथ ही बीच में कई बार ऐसे हालात बने कि उन्हें बीएसएफ ने कह दिया हालात खराब है वह गांव खाली कर दें।
उन्होंने कहा कि उनके परिवार में चार बेटियों की शादी कर दी है और एक बेटा पुलिस में है। बेटियों की शादी और बेटे की नौकरी की चिंता इतनी नहीं हुई जितनी बार-बार पलायन करने के बाद फिर घर जाने की होती है।
1965 की जंग में तो टांग में गोली भी लगी थी। कभी जंग के कारण तो कभी सीजफायर उल्लंघन के कारण, अब स्थायी हल निकाल ही दिया जाना चाहिए।
वहीं नानक चंद ने कहा कि बार बार पलायन करने से बेहतर है जवानों को एक ही बार में हमला करने की इजाजत दी जाए। उन्होंने कहा 2002 में जब मुंहतोड़ जवाब मिला था तो उसके बारह सालों बाद जाकर पाक ने फिर हिमाकत की है।
एक बार फिर से ऐसा ही जवाब मिला तो अगले एक दशक के लिए सुख की सांस लेंगे लेकिन बार बार की जंग से छुटकारा मिल जाए तो ही आराम मिलता है। अब तो तंग आ गए हैं।