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सौ के पार पहुंचा कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा

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कठुआ रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की कोरोना जांच करते स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : KATHUA
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कठुआ। कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने तेजी से कठुआ जिले को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। बुधवार को जिले के विभिन्न इलाकों से कोरोना संक्रमण के 29 मामले सामने आए हैं। इनमें 14 यात्रा इतिहास और 15 सामुदायिक संक्रमण के मामले हैं। इनके साथ ही जिले में सक्रिय संक्रमितों का आंकड़ा 100 के पार पहुंच गया है। जिले में 109 सक्रिय संक्रमित हैं। बुधवार को पूर्व में संक्रमित पाए गए दस लोगों की रिपोर्ट भी निगेटिव आई है।
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स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार संक्रमित पाए गए लोगों में तीन हटली मोड़, एक कान्हा चक, एक जंगलोट, चार मंगतिया, एक नगरी, एक चक राम सिंह, एक वार्ड 16 कठुआ, दो वार्ड चार कठुआ, एक जंडोर हुकमी, एक वार्ड तीन कठुआ, दो द्रम्मण, दो शीतलनगर, एक करडोह, एक खड्डी, एक जानू, एक सांधर, एक डीसी कार्यालय, एक शिवानगर, एक बिलावर, एक शिव शक्ति केमिकल इंडस्ट्री और लखनपुर में तैनात सीआरपीएफ का जवान शामिल हैं। संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान जारी है। उधर, जिले में संक्रमितों को आइसोलेशन की व्यवस्था उपलब्ध करवाते हुए कोविड केयर सेंटर को भी सक्रिय कर दिया गया है। फिलहाल इसमें चार लोगों को आइसोलेट किया गया है।
व्यवस्था में चूक बढ़ा सकती है कोरोना के मामले
कठुआ। देश में बढ़ते कोरोना के मामलों से जम्मू-कश्मीर में लोगों को बचाए रखने के लिए लखनपुर में सख्ती बढ़ाई जा रही है। दूसरी तरफ रेलवे स्टेशन पर लचर व्यवस्था अपनाई जा रही है जो यहां महामारी को बढ़ा सकती है। सबसे खास बात यह है कि रेल यात्रा कर आने वाले हर यात्री का अनिवार्य रूप से कोरोना टेस्ट किए जाने और पॉजिटिव पाए जाने के बाद भी संक्रमित को घर जाने दिया जा रहा है। इसके कारण संक्रमण के और ज्यादा बढने के आसार बनने लगे है।
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आपको बता दें कि जिला के एक मात्र रेलवे स्टेशन पर इस समय बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों को उतरने की व्यवस्था है जहां स्वास्थ्य विभाग द्वारा बनाए गए विशेष काउंटर पर उन्हें कोरोना टेस्ट करवाना अनिवार्य है। यहां आने वाले हर यात्री का कोरोना टेस्ट भी हो रहा है लेकिन इस सबके बावजूद संक्रमित पाए गए यात्रियों को अन्य लोगों के संपर्क में आने से बचाने के लिए केवल कागजी व्यवस्था पर काम हो रहा है। जिसके चलते पाजिटिव हुए व्यक्ति को भी बिना किसी व्यवस्था के घर भेजा जा रहा है। हालात तब और खराब हो जाते हैं जब वहीं कोरोना संक्रमित आम सार्वजनिक यातायात को उपयोग करते देखा जाता है।
क्या कहते है लोग
एक ओर सरकार लोगों से इस महामारी से बचने के लिए समाजिक दूरी के साथ स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय का पालन करने की अपील कर रही है। विश्वव्यापी महामारी में ऐसी लापरवाही लोगों को मौत के मुंह में धकेल सकती है। पिछले चौबीस घंटों के दौरान भी इसी रेलवे स्टेशन पर कोरोना संक्रमण के तीन मामले प्रकाश में आए है। लिहाजा यहां की व्यवस्था में चूक की गुंजाइश नही होनी चाहिए। अगर बाहरी राज्यों से आने वाले लोगों को आइसोलेट करने की सरकारी तौर पर व्यवस्था है तो संक्रमित पाए गए लोगो के लिए भी ऐसी ही व्यवस्था का प्रावधान होना चाहिए। तभी लोगों को इस महामारी से बचाया जा सकता है।
- शशि शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता।
क्या कहते हैं अधिकारी
पॉजीटिव आने के बाद भी लोग सरकार द्वारा जारी की गई कोरोना की गाइड लाइन का पालन नही कर रहे है तो यह चिंता का विषय है। अभी तक विभाग की ओर की गई व्यवस्था के तहत ऐसे लोग जो कि बाहर के हैं और उनका कठुआ में कोई अपना निवासी नही है उन्हें संक्रमित पाए जाने के बाद खरोट गांव में बनाए गए आइसोलेट सेंटर में रखने की व्यवस्था की गई है। वहीं स्थानीय लोगों को सभी हिदायतें देने के बाद उनके घर व्यक्तिगत वाहन से जाने के दिया जा रहा है। जहां स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी उनके स्वास्थ्य पर नजर रखेंगे। अगर लोग व्यक्तिगत वाहनों में जाने के बजाए यात्री वाहनों का उपयोग कर रहे हैं तो स्वास्थ्य विभाग उन्हें भी एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराएगा। ताकि कोरोना से आम लोगों को बचाया जा सके।
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डॉ अशोक चौधरी, जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
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