एनरोमलेंट ड्राइव के लिए लोगों को जागरूक करते शिक्षक। संवाद
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कठुआ। प्रदेश में नई शिक्षा नीति को लागू कर शिक्षा विभाग को ढर्रे पर लाने के लिए जहां एक ओर प्रयास हो रहे हैं, वहीं सरकारी स्कूलों के प्रति आम लोगों का नजरिया नहीं बदल पाया है। इसकी एक बड़ी वजह सरकारी तंत्र की लापरवाही भी है। जिले में निजी स्कूलों ने नवरात्र तक जहां दाखिले की प्रक्रिया को पूरा कर कक्षाएं भी शुरू कर दी हैं, वहीं पुराने ढर्रे और सुस्त रफ्तार से चल रहा शिक्षा विभाग ने अब जाकर एनरोलमेंट ड्राइव शुरू कर पाया है।
ग्रामीण स्तर पर शिक्षक लोगों के घर जा रहे हैं और सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं। जिले में शिक्षा विभाग की ओर से 30 ऐसे स्कूल चिह्नित किए गए हैं जहां जीरो एनरोलमेंट बताई गई। बाकायदा प्रशासनिक विभाग ने स्वास्थ्य विभाग को अपने किराए के कमरों में चल रहे सब सेंटर या पीएचसी को इन इमारतों में शिफ्ट करने का प्रपोजल भी मांगा है। जिले में 40 के लगभग ऐसे स्कूल भी शिक्षा विभाग की ओर से चिह्नित हैं, जहां मात्र 60 बच्चे पढ़ रहे हैं, जबकि पढ़ाने वाले शिक्षकों की संख्या 68 है।
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