सरकार की झोली में एक करोड़ दो लाख 50 हजार का राजस्व, झील से मछली चोरी की वारदातों पर भी लगेगी रोक
कठुआ। 12 निविदाओं को आमंत्रित करने के बाद आखिरकार रंजीत सागर झील में सवा साल के बाद मछली पकड़ने के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
1,02,50,000 रुपये की बोली के साथ झील में मछली पकड़ने का ठेका इस बार जम्मू की फर्म को मिल गया है। इसके साथ ही झील में पिछले एक साल से मछली चोरी को लेकर सामने आ रहे मामलों पर भी अब विराम लग जाएगा। रंजीत सागर झील में इस समय मछली पकड़ने पर प्रतिबंध है जो 31 अगस्त तक चलेगा। सितंबर से मछली पकड़ने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। इसी बीच विभाग ने पिछले एक साल से भी अधिक से लंबित चल रही निविदा प्रक्रिया को पूरा कर लिया है।
विभाग ने पहली बार देश भर से ठेकेदारों को इस निविदा प्रक्रिया में मछली पालन विभाग ने आमंत्रित किया था। जम्मू-कश्मीर सरकार के पास रंजीत सागर जलाशय का लगभग 58 फीसदी से अधिक हिस्सा है, जबकि पंजाब के पास 35 फीसदी और शेष हिमाचल के हिस्से आता है। 87 वर्ग किलोमीटर में फैली हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सीमा पर यह झील अनुच्छेद 370 हटने के बाद प्रदेश सरकार के लिए राजस्व का एक बड़ा जरिया भी बनी है। दरअसल अनुछेद 370 की समाप्ति के बाद लाखों में होने वाली बोली प्रक्रिया अब करोड़ों में पहुंच गई है।
वर्ष 2021 में मछली निकालने के ठेके से 52 लाख, जबकि वर्ष 2022 में एक करोड़ 22 लाख रुपये की राशि सरकार के खजाने में आई थी। बीते साल यह प्रक्रिया एक करोड़ 33 लाख में पूरी हुई थी। बीते साल मछली पकड़ने का ठेका समाप्त होने के साथ ही विभाग ने निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी थी। प्रक्रिया समय पर न होने से सरकार को भी नुकसान हो रहा था उधर, मछली चोरी की वारदातें भी लगातार सामने आ रही थीं। ऐसे में विभाग ने एक करोड़ की न्यूनतम बोली प्रक्रिया को पूरा करते हुए झील में मछली पकड़ने का ठेका 1,02,50,000 में आबंटित कर
दिया है।
रंजीत सागर झील से मछली पकड़ने के लिए निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। अगस्त के अंत तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध है। इसके बाद ठेकेदार झील से मछली पकड़ने का काम शुरू कर देंगे। विभाग की ओर से इस अवधि में रंजीत सागर झील में मछलियों के बीज की स्टॉकिंग भी कर दी जाएगी।
- पवन पाल शर्मा, सहायक निदेशक मछली पालन विभाग कठुआ