कठुआ। सरकारी स्कूलों में आने वाले विद्यार्थियों में कई ऐसे भी छात्र होते हैं, जिनकी परिवारिक परिस्थितियों के कारण उनकी प्रारंभिक शिक्षा कमजोर होती है। हमें धैर्य रख कर विद्यार्थी को प्रोत्साहित करने जरूरत है। इन बच्चों की योग्यता को परखकर उनकी शिक्षा को आगे बढ़ाना होगा।
उक्त बातें समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पांच दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल कठुआ के प्रधानाचार्य तारा चंद शर्मा ने कही। नव आदर्श हायर सेकेंडरी स्कूल परिसर में जारी कार्यशाला के दौरान सुरिंदर मडयाल वरिष्ठ व्याख्याता डाइट बसोहली ने कहा कि हमें स्कूल में हर बच्चे को लाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका और जिम्मेदारियों पर भी जोर दिया। मडयाल ने दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए वर्तमान शिक्षा प्रणाली और आगे के कार्यों पर भी अपने विचार व्यक्त किए।
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कार्यशाला के पहले सत्र में मास्टर कुसुम लता ने एचपीसी और प्रारंभिक मूल्यांकन विकसित करने के तरीके पर लिया। वहीं, दूसरे सत्र में हायर सेकेंडरी स्कूल फोरलेन की प्रधानाचार्य अंजू शांडिल्य ने प्रतिभागियों के साथ सांकेतिक भाषा पर चर्चा की और समावेशी शिक्षा पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में शिक्षक रवि कुमार ने मंच संभाला और समय-समय पर प्रतिभागियों को उत्साहित किया। उन्होंने मौजूदा कक्षा की स्थिति और आगे के कार्य तथा सभी के लिए शिक्षा के लक्ष्य को साकार करने में शिक्षक की भूमिका पर चर्चा की।