कठुआ जिले में सुफैन इलाके के अंबेनाल में सोमवार को फिर संदिग्ध देखे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं। एक साल पहले इस इलाके में पाकिस्तान से घुसपैठ कर आए आतंकियों से मुठभेड़ में चार पुलिस जवान बलिदान हुए थे। उज्ज दरिया से सटा यह इलाका घुसपैठ के बाद पहाड़ों को जाने का रूट भी है। संदिग्धों को मार गिराने के लिए सुरक्षाबलों ने घेराबंदी कर ली है।
सुफैन का अंबेनाल, राजबाग में पड़ता है। सूत्रों के अनुसार एक स्थानीय व्यक्ति ने दो हथियारबंद संदिग्धों को भारी बैग लिए जंगल की ओर जाते देखा। सूचना मिलते ही पुलिस, एसओजी, सेना और सीआरपीएफ इलाके में पहुंची और तलाशी अभियान चलाया। देर शाम तक संदिग्धों का सुराग नहीं मिल पाया। संदिग्ध भाग न पाएं सुरक्षाबलों ने कठुआ और बिलावर दोनों ओर से घेराबंदी कर ली है। इलाके को खंगालने के साथ ही भागने के रास्तों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। बिलावर के पंजतीर्थी, भिनी नाले, बरोटा, अगलीधार और आसपास के इलाकों को भी चप्पा-चप्पा खंगाला जा रहा है।
ज्ञात रहे कि बीते साल मार्च के अंत में इसी इलाके में पाकिस्तान से घुसपैठ कर आए जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकियों को सुरक्षाबलों ने दो दिन चले ऑपरेशन के बाद ढेर किया था। इस ऑपरेशन में चार पुलिसकर्मी भी बलिदान हुए थे।
सुचार के जंगल में मिली दवाएं और इंजेक्शन
सूत्रों के अनुसार सुरक्षाबलों को बिलावर के सुचार के जंगलों में गश्त के दौरान सुरक्षाबलों को कुछ दवाएं, इजेक्शन और एनर्जी ड्रिंक मिले हैं। बताया जा रहा है कि इन इंजेक्शन का जानवरों के लिए भी इस्तेमाल होता है। ऐसे में फिलहाल इस क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है लेकिन आबादी से दूर इस इलाके में सामान मिलने से सुरक्षाबल सतर्क हैं।
घुसपैठ कर पहाड़ों पर डेरा जमाने की फिराक में आतंकी
भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ के पुराने रूट को भले ही सुरक्षाबलों ने सील कर दिया हो लेकिन उज्ज के पुराने रूट का आतंकी इस्तेमाल इलाके में मूवमेंट के लिए लगातार करते रहे हैं। खासकर उज्ज दरिया और इसके सहायक नालों से आतंकी घुसपैठ के बाद पहाड़ों में जाते रहे हैं। अंबेनाल भी इसी रूट पर है। उज्ज के रास्ते आतंकियों की लोहाई मल्हार के पहाड़ी इलाकों में मूवमेंट होती रही है।
उधमपुर और कठुआ जिले के पहाड़ों को जोड़ते हैं नाले
जखोल और बिलावर के पंजतीर्थी इलाके में पांच दरिया व नालों का संगम है। यहीं से उधमपुर और बिलावर के लिए रूट हैं। आतंकी घुसपैठ के बाद इन्हीं रूट का इस्तेमाल करते रहे हैं। यह नाले उधमपुर और कठुआ जिले के दूरदराज पहाड़ों को जोड़ते हैं। साल के इन दिनों आतंकियों की घुसपैठ पिछले कई साल में दर्ज होती रही है। यह इसलिए भी संवेदनशील है चूंकि पहाड़ों पर खानाबदोशों के लौटने का समय शुरू हो जाता है। आतंकी भी इसी फिराक में पहाड़ तक पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। इसलिए सुरक्षाबल कड़ी निगरानी बनाए हुए हैं।