स्वास्थ्य मंत्री बाली भगत ने वीरवार सुबह जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। सुबह दस बजे जिला अस्पताल अधीक्षक के कमरे में पहुंचे मंत्री ने अधीक्षक को गैरहाजिर पाकर निदेशालय से अटैच कर दिया। साथ ही दो दिन के भीतर नए अधीक्षक की तैनाती के निर्देश भी जारी कर दिए। अस्पताल के कामकाज की समीक्षा के साथ देनदारी की भी जानकारी ली। अनियमितताएं मिलने पर मंत्री कुछ दवाओं के बिल भी साथ ले गए, जिनकी खरीद स्थानीय बाजार से की गई थी। इस दौरान अस्पताल स्टाफ में हड़कंप की स्थिति रही।
जिला अस्पताल पहुंचे मंत्री ने उप अधीक्षक डा. गुरदीप सिंह से जानकारी मांगी। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने मंत्री को बताया कि अस्पताल पर दवाओं की खरीद के चलते देनदारी बनी हुई है, जिसका भुगतान रोगी कल्याण समिति की राशि से किया जा रहा है। मंत्री ने देनदारी की विस्तृत जानकारी ली, तो पता चला कि आठ साल पहले की गई दवाओं की खरीद अभी भी अस्पताल पर बोझ बनी हुई है। उप अधीक्षक ने बताया कि प्रति माह अस्पताल को साढ़े पांच लाख रुपये की राशि की आवश्यकता होती है, जबकि आमदनी मात्र साढ़े तीन लाख है।
वहीं कुछ दवाओं की खरीद स्थानीय स्तर पर की जाती रही हैं। अस्पताल अधीक्षक द्वारा बिना अनुमति की गई खरीद पर मंत्री भड़क गए और अधिकारियों को फटकार भी लगाई।
मंत्री को अधिकारियों ने बताया कि प्रति माह एक लाख रुपये की आय अस्पताल में पार्किंग की आउटसोर्सिंग से होती थी, लेकिन जून महीने से यह भी बंद है, क्योंकि टेंडर नहीं करवाए गए।