- 110 करोड़ की भारी भरकम राशि से चड़वाल में तैयार हो रहा 840 मीटर लंबा सुपर स्ट्रक्चर
- फ्लाईओवर के 19 पिलर पर 304 अलग-अलग तैयार ढांचे किए जा रहे स्थापित, क्षेत्र में जाम से भी मिलेगी निजात
साहिल खजूरिया
कठुआ। लगभग 110 करोड़ की भारी भरकम राशि से चड़वाल में तैयार हो रहे 840 मीटर लंबे फ्लाईओवर के सुपर स्ट्रक्चर का काम आखिरकार शुरू हो गया है। पोस्ट टेंशनिंग तकनीक से फ्लाईओवर के 19 पिलर पर 304 अलग-अलग तैयार ढांचे स्थापित किए जा रहे हैं।
प्री कास्टिंग तकनीक से तैयार इन ढांचों को पहले ग्लू और फिर टेंडम से मजबूती प्रदान की जाएगी। निर्माण में जुटी मेगा इंफ्रा लिमिटेड के अधिकारियों का दावा है कि 34.5 मीटर चौड़ा प्रत्येक यह सुपर स्ट्रक्चर अबतक एशिया में तैयार नहीं हुआ है। ऐसे में यह अपने आप में भी एक मिसाल होगा।
जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे पर घनी आबादी वाले इलाकों को बाईपास करते हुए यह फ्लाईओवर जाम से निजात दिलाएगा। सुपरस्ट्रक्चर का निर्माण दिल्ली मेट्रो के फ्लाईओवर की तर्ज पर किया जा रहा है। इसमें घनी आबादी वाले इलाके में यातायात बहाल रखने के साथ ही ढांचे को स्थापित करने का काम शुरू कर दिया है। निर्माण एजेंसी के अनुसार चड़वाल में तैयार हो रहे फ्लाईओवर में प्रति स्पैन लंबाई जहां 44.11 मीटर की रहने वाली है तो चुनौतीपूर्ण चौड़ाई 34.5 मीटर की रहेगी। इसके बाद राजमार्ग को आठ मीटर की चौड़ाई वाली सड़क पर चलाया जाएगा। खास बात यह है कि सुपर स्ट्रक्चर के हर सेग्मेंट का वजन 120 से 145 टन तक का है। ऐसे में इसे स्थापित करने के लिए खास मशीनों का भी प्रयोग किया जा रहा है।
घनी आबादी होने के चलते एक्सप्रेस वे पर कम चौड़ाई का भी दबाव था। लिहाजा सुपर स्ट्रक्चर को तैयार करने के लिए इसके ढांचों को तरनाह में पहले ही कास्टिंग कर तैयार किया जा रहा है। मेगा इंजीनियरिंग के परियोजना अधिकारी शैलेंद्र पांडेय ने बताया कि आम तौर पर फ्लाईओवर को तैयार करने की प्रक्रिया में प्लिंथ से पिलर और फिर उसके ऊपर ढांचे को स्थापित किया जाता है। लेकिन इस तकनीक में अलग से और पूर्व में ही ढांचे तैयार कर लिए जा रहे हैं।
चड़वाल के फ्लाईओवर के निर्माण का तरीका पारंपरिक पुल निर्माण से बिल्कुल अलग है। इसके सेगमेंट को निर्माण यार्ड में प्री कास्ट किया जाता है। इसके बाद ट्रेलर में रखकर ढांचे पर लगा दिया जाता है। इसके बाद इस पर सिर्फ तारकोल ही डाले जाने का काम शेष रह जाता है।
-राजीव कुमार, परियोजना निदेशक, एनएचएआई जम्मू