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Kathua News: जिले के किसानों को खूब रास आ रही सुपर सीडर सोइंग मशीन

Tue, 12 Nov 2024 02:31 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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सुपर सीडर से बिजाई की तैयारी करते अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांव के किसान। संवाद - फोटो : Kathua
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अब तक जिले के 40 फीसदी किसानों ने अपनाई प्रक्रिया
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मशीन से एक ही लाइन में कम नुकसान और बेहतर पैदावार के साथ बोए जा सकते हैं बीज
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। फसल बिजाई में कम लागत, समय की बचत के साथ ही अधिक मुनाफे की सुपर सीडर सोइंग मशीन जिले के किसानों को खूब रास आ रही है। ट्रायल के तौर पर कुछ साल पहले हुई शुरुआत के बाद अब जिले के 40 फीसदी तक किसानों ने इस प्रक्रिया को अपना लिया है। सुपर सीडर सोइंग मशीन से एक ही लाइन में कम नुकसान के और बेहतर पैदावार के साथ बीज बोए जा सकते हैं।
इसके अलावा यह पानी की भी बचत करता है। ऐसे में किसान इसे सोने पर सुहागा की तरह देख रहे हैं। उधर, कृषि विभाग की इस मशीन को तरजीह दे रहा है और विभागीय कर्मचारी किसानों को तकनीकी जानकारी भी मुहैया करवा रहे हैं।
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नई पहल के तहत जिले में गेहूं का उत्पादन करने वाले करीब 40 हजार हेक्टेयर में से 40 फीसदी कृषि योग्य भूमि पर इस बार नई तकनीक से बिजाई करवाई जा रही है। विभाग का दावा है कि इससे समय की बचत के साथ-साथ खाद और बीज भी कम लगेगा। फसल की बिजाई लागत कम होने से किसानों की आय के भी बढ़ने का अनुमान है। इस वर्ष निचले इलाकों में इस तकनीकी का उपयोग धान उत्पादक क्षेत्र में विशेष तौर से किया जा रहा है। क्योंकि इन इलाकों में मजदूरों के अभाव के चलते धान की कटाई का काम कंबाइन से करवाया गया है। इससे खेतों में पराली के अवशेष काफी ज्यादा जमा हैं। अगर इन इलाकों में सुपर सीडर से बिजाई का काम किया जाता है तो इससे खेतों में किसानों के लिए समस्या बनने वाली पराली उर्वरक का काम करेगी।
लाइन सोइंग के निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए कृषि विभाग जिले में मौजूद करीब एक दर्जन सुपर सीडर उपयोग किए जाएंगे। विभाग के अनुसार जिले के प्रगतिशील किसानों ने इसमें अपनी रुचि दिखाई है। इसके चलते जिला कृषि विभाग ने छह किसानों को सुपर सीडर उपलब्ध करवाने में मदद की है, जबकि इतने ही सुपर सीडर किसान ने खुद खरीदे हैं। ऐसे में उपलब्ध 12 सुपर सीडरों से जिले की 40 खेती के बिजाई का काम किए जाने की संभावना है। एक सुपर सीडर 1 से 2 घंटे में एक एकड़ तक बिजाई कर सकता है।
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पिछले साल पंजाब से लाई गई सुपर सीडर से सोइंग की थी। इसमें लागत भी कम आई और उत्पादन पारंपरिक बिजाई के मुकाबले ज्यादा दिखा। यही नहीं फसल बिजाई के समय खेत को होने वाले पानी की जरूरत भी महसूस नहीं हुई। कुल मिलाकर जिस तरह से मौसम में परिवर्तन हो रहा है, ऐसे में यह मशीन हमारे इलाके के लिए वरदान बन सकती है।
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किसान राज कुमार, कीडियां गंडियाल

जिला कृषि विभाग हर तरह से किसानों की मदद करने का प्रयास करता है। नई तकनीकी किसानों की आय बढ़ाने के साथ ईको फ्रेंडली भी है। इसमें बिजाई के दौरान होने वाली बचत और करीब 25 प्रतिशत तक अधिक होने वाला उत्पादन किसानों के लिए सीधे तौर पर लाभकारी है। इस मशीन का उपयोग पर्यावरण संरक्षण में भी मदद कर सकता है। सुपर सीडर से बिजाई करने लिए किसानों को खेत में पड़े धान के अवशेष को हटाने के उन्हें जलाना नहीं पड़ेगा। इससे साथ-साथ फसल में पौध की निश्चित दूरी के कारण उसमें हर्बीसाइड और पेस्टीसाइड की जरूरत नहीं पड़ती है।


मुरारी लाल डिगरा, जिला कृषि अधिकारी एक्सटेंशन
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