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Kathua News: छठी व सातवीं के छात्रों ने तैयार की साइबर टूल किट, आईडी चोरी से करेगी सुरक्षा

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आर्मी प​ब्लिक स्कूल के विद्या​र्थियों को स्कूल प्रबंधन की ओर से किया गया प्रोत्साहित
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आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ पुणे की ओर से आयोजित एआई प्रतिस्पर्धा में एपीएस जंगलोट के विद्यार्थी देश में पहले स्थान पर
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.... देश भर से 64 आर्मी स्कूल के 600 से ज्यादा विद्यार्थियों ने लिया था भाग

संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। आर्मी पब्लिक स्कूल (एपीएस) जंगलोट के तीन विद्यार्थियों ने ऐसी साइबर टूल किट तैयार की है जो किसी की पहचान चोरी को रोकने का काम करेगी। इसके साथ-साथ इंटरनेट के उपयोग को भी साइबर हमलों से सुरक्षित बनाएगी।
इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित टूलकिट को तैयार करते हुए स्कूल के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में देश के 64 आर्मी पब्लिक स्कूल में पहला स्थान भी हासिल किया है। इस प्रतिस्पर्धा में देश के 600 से ज्यादा विद्यार्थियों ने भाग लिया था। प्रतिष्ठित नवयुग इंटर एपीएस एआई हैकाथॉन का आयोजन एआई मेट समुदाय की ओर से आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे में किया गया। जिसमें देश भर के प्रतिभागियों ने उल्लेखनीय नवाचार और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया।
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आर्मी पब्लिक स्कूल कठुआ के छठी और सातवीं कक्षा के छात्रों विवाण राव, आरूष शर्मा और भाग्यजीत कौर ने सफलता पाई। विद्यार्थियों ने बताया कि साइबर सुरक्षा टूलकिट, पूरी तरह से पाइथन का उपयोग करके विकसित की गई है। यह कई प्रमुख विशेषताओं से सुसज्जित है। इसमें नेटवर्क स्कैनर, नेटवर्क कॉन्फ़िगरेशन का निरीक्षण करता है, जुड़े हुए उपकरणों की पहचान करता है, और आईपी पते और खुले पोर्ट को स्कैन करके उनकी सुरक्षा का आकलन करता है।
फिशिंग डिटेक्टर का उद्देश्य ज्ञात फिशिंग यूआरएल और मशीन लर्निंग एल्गोरिदम का उपयोग करके संभावित फिशिंग प्रयासों के लिए आने वाले ईमेल और वेब लिंक का विश्लेषण करके उपयोगकर्ताओं को भ्रामक हमलों से बचाना है। अंत में, साइबर सुरक्षा समाचार सुविधा उपयोगकर्ताओं को विश्वसनीय स्रोतों से नए खतरों, सुरक्षा उल्लंघनों और प्रगति पर अपडेट को एकत्रित करके साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में नवीनतम विकास के बारे में सूचित रखती है।
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ये उपकरण सामूहिक रूप से सुरक्षा जागरूकता और सुरक्षा को बढ़ाते हैं। स्कूल प्रधानाचार्य डॉ विशाखा शर्मा ने कहा कि यह गौरवपूर्ण उपलब्धि न केवल एपीएस जंगलोट को सम्मान दिलाती है, बल्कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए प्रयासरत अन्य संस्थानों के लिए प्रेरणा का काम भी करती है। स्कूल की सफलता छात्रों के बीच नवीन सोच और तकनीकी कौशल को बढ़ावा देने पर बढ़ते जोर को दर्शाती है।

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