प्रतिदिन खाली किए जाने वाले डस्टबिन में भरा कचरा, फर्श का हाल बेहाल
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। सफाई कर्मचारियों की जारी हड़ताल से शहर के साथ अब सरकारी कार्यालय भी कचरे के ढेर से दबने लगे हैं। कुछ कार्यालयों में कई-कई दिनों से झाड़ू नहीं लग रहा है तो कई जगह कचरे के ढेर दिखाई देने लगे हैं।
सबसे बुरी स्थिति डीसी कार्यालय परिसर में दिखाई दे रही है। नगर परिषद का खुद का कार्यालय इससे अछूता नहीं है। नगर परिषद कार्यालय परिसर में तो कचरा बिखरा ही है कार्यालय के अंदर भी हाल बेहाल है। यहां प्रतिदिन खाली किए जाने वाले डस्टबिन से कचरे से भरे हैं, वहीं फर्श का भी हाल बेहाल है। यहां कार्यालय में काम के लिए आने वाले लोगों के साथ कर्मचारियों को भी ऐसे ही हालात में सरकारी कामकाज पूरा करना पड़ रहा है। वहीं डीसी कार्यालय का परिसर में भी हाल बेहाल है। परिसर के मिनी सचिवालय में समाज कल्याण विभाग के जिला अधिकारी के कार्यालय के सामने कचरे का ढेर लगा है। वहीं कार्यालयों की इमारत में बनी खिड़कियाें से कर्मचारियों की ओर से बाहर फेंका जाने वाला कचरा वहां बने रेन शेड पर भरा देखा जा सकता है। इसका हड़ताल के कारण निस्तारण नहीं हो रहा है।
रामनगर से आए दुर्गा शंकर का कहना है कि हड़ताल से पूरे शहर में हर ओर गंदगी का आलम है। इससे लोग परेशान हैं। अब अगर जिले के डीसी के कार्यालय परिसर का ऐसा हाल है तो लोग भी किस तरह से सफाई होने की उम्मीद कर सकते हैं।
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बता दें कि शहर के कुछ वार्ड में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन होने से वहां कचरे के ढेर नहीं दिखाई दे रहे हैं। मगर सफाई व्यवस्था घरों, दुकानों और संस्थानों से निकलने वाले कचरे को लेने तक ही सीमित है। लिहाजा वहां भी गलियों और सड़कों पर झाड़ू नहीं लग रहा है। जबकि अन्य वार्डों की हालत और ज्यादा खराब है। यहां न तो कचरा उठ रहा है और न ही झाड़ू लग रहा है।
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उधर, नियमित किए जाने की मांग को लेकर आठ दिनों से जारी हड़ताल के बाद भी कोई हल न निकलने पर सफाई कर्मचारियों ने शहर में रोष मार्च निकाला। नगर परिषद कार्यालय से निकाले इस रोष मार्च में शामिल सफाई कर्मचारियों ने मांगों को लेकर नारेबाजी करते हुए मुखर्जी चौक, गर्ल्स हायर सेकेंडरी चौक, शहीदी चौक, अंबेडकर ब्रिज, पारलीवंड, जराई चौक में हुंकार भरी। रोष मार्च में शामिल सफाई कर्मचारियों का कहना था कि वह लोग अपने एक मात्र मांग उन्हें नियमित किए जाने पर अड़े हैं। अब तक की सरकारों ने उन्हें झूठे आश्वासन देकर पिछले कई सालों से छला है। मगर अब ऐसा नहीं होगा। जब तक उनकी मांग पूरी करने के लिए सरकारी की ओर से कोई पहल नहीं होती है, उनकी हड़ताल इसी तरह से जारी रहेगी।