संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। नियमितीकरण की मांग को लेकर सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पिछले 13 दिनों से जारी है। हालत यह है कि शहर की स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सड़कें पहले से ही गंदगी से पटी हुई थीं, अब गलियां भी बजबजाने लगी हैं। घरों के दरवाजे खुलते ही बदबू से लोग परेशान हो जा रहे हैं।
पहले नगर परिषद की ओर से चिह्नित डंपिंग प्वाइंटों तक सीमित रहने वाला कचरा अब रिहायशी गलियों और बाजारों तक पहुंच गया है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर के विभिन्न हिस्सों में जगह-जगह कचरे के ढेर लगने से उठ रही दुर्गंध ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। भीषण गर्मी के बीच सड़कों और गलियों में सड़ता कचरा संक्रामक बीमारियों के खतरे को भी बढ़ा रहा है।
मुखर्जी चौक, ओल्ड सुपर बाजार, कोऑपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी क्षेत्र, शहीदी चौक, जिला पुलिस मुख्यालय के आसपास, पारलीवंड के जराई चौक, फुट ब्रिज चौक तथा ओल्ड बस स्टैंड सहित कई स्थानों पर कचरे के अंबार लगे हुए हैं। मुख्य बाजार की नालियां कचरे से जाम हो चुकी हैं। दुकानदार प्रतिदिन निकलने वाले कचरे को जलाकर निपटाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन क्षेत्र में स्वच्छता की स्थिति लगातार खराब बनी हुई है।
स्थानीय संजीव कुमार गुप्ता का कहना है कि गलियों में जमा हो रहा कचरा अब सबसे बड़ी समस्या बन गया है। कचरे के कारण छुट्टा मवेशियों की आवाजाही बढ़ गई है। मुख्य बाजार से सटे वार्ड नंबर 5, 6 और 7 के निवासी इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित हैं। संकरी गलियों में मवेशियों के झुंड आने से बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए खतरा पैदा हो गया है।
जानकारी के अनुसार, करीब एक लाख की आबादी वाले कठुआ शहर के 21 वार्डों से प्रतिदिन लगभग 40 टन कचरा निकलता है। पिछले 13 दिनों से कचरे का उठान और निस्तारण पूरी तरह बंद होने के कारण शहर में करीब 400 टन से अधिक कचरा जमा हो चुका है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में शहर को गंभीर स्वच्छता और स्वास्थ्य संकट का सामना करना पड़ सकता है।
इस बारे में कठुआ नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अमित शर्मा ने बताया कि सफाई कर्मचारी अपनी जिन मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे हैं, उन्हें पूरा करना सरकार के दायरे में है। फिलहाल शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा को देखते हुए हड़ताल पर बैठे सफाई कर्मचारियों से ही संवाद किया जा रहा है ताकि यात्रा के शुरू होने से पहले शहरी क्षेत्र को कचरे से मुक्त बनाया जा सके।