कठुआ। वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीपी) 2.0 की पहली समीक्षा बैठक कठुआ स्थित डीसी कार्यालय के समभागार में आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता डीसी राजेश शर्मा ने की, जिसमें सीमावर्ती गांवों के सतत और समावेशी विकास के लिए रणनीतिक दिशा तय की गई।
वीरवार को आयोजित बैठक में बताया गया कि ब्लॉक मढ़ीन के अंतर्गत छह सीमावर्ती गांवों की पहचान की गई है। इन गांवों में योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं। थीमैटिक सर्वे के आधार पर एक कन्वर्जेंस प्लान तैयार किया जाएगा, जिससे पात्र योजनाओं की संतृप्ति सुनिश्चित की जा सके। साथ ही, अधोसंरचना, सेवाओं और लाभार्थी कवरेज में मौजूद कमियों को दूर करने के लिए एक व्यापक गैप एनालिसिस भी की जाएगी। इसके लिए एसडीएम हीरानगर को वीवीपी 2.0 के लिए जिला नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। चिन्हित गांवों में चारों मूलभूत संकेतकों की संतृप्ति पहले ही सुनिश्चित की जा चुकी हैं, जिससे आगामी विकास कार्यों के लिए मजबूत आधार तैयार हुआ है।
डीसी कहा कि सीमावर्ती गांवों को आत्मनिर्भर और मुख्यधारा के विकास से जोड़ने के लिए स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने ग्राम नोडल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सभी विभागों के साथ समन्वय बनाकर कार्य करें ताकि आजीविका, संपर्क सुविधा, शिक्षा, स्वास्थ्य और नागरिक सुविधाओं जैसे क्षेत्रों में अधिकतम लाभ स्थानीय निवासियों तक पहुंच सके। इस मौके पर अतिरिक्त जिला विकास आयुक्त सुरिंदर मोहन, अतिरिक्त उपायुक्त विश्वजीत सिंह, मुख्य योजना अधिकारी रंजीत ठाकुर, सहायक आयुक्त विकास अखिल सडोत्रा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।