उज्ज दरिया के किनारे पर लगे स्टोन क्रशर
जल संसाधन अधिनियम को ताक पर रखकर जिला प्रशासन और खनन विभाग ने स्टाने क्रशर को अनुमति दी। नतीजतन दर्जनों स्टोन क्रशर दरिया और बरसाती खड्डों के बीचोंबीच आबाद हो गए। इससे न केबल अधिनियम के नियमों का धड़ल्ले से उल्लंघन हुआ बल्कि दरिया और खड्डों के बीच लगे हजारों टन रेत और बजरी के ढेर जलस्रोत के बहाव में बाधा बन गए।
पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा के बीचोंबीच बहने वाला रावी दरिया इसका जीता जागता उदाहरण है। पिछले दो दशकों से दोनों राज्य के खनन माफिया जिस तरह से जल संसाधन अधिनियम और पर्यावरण के नियमों की धज्जियां उड़ाई है, वे किसी से छुपी हुई नहीं है। जिसको लेकर प्रदेश सरकार में उपमुख्यमंत्री से लेकर पर्यावरणवादी चिंता जाहिर कर चुके है। अगस्त महीने में दरिया और बरसाती खड्डों में आई भयंकर बाढ़ ने जहां वाटर बॉडीज के किनारों पर बेतहाशा अतिक्रमण की पोल खुलने पर जिला प्रशासन ने अपनी सतर्कता दिखाई है। तो वहीं बाढ़ के बाद खनन माफिया और स्टोन क्रशर मालिकों के चेहरे खुशी से गुलजार हो गए है। दरअसल, इसी वर्ष अगस्त में आई बाढ़ पूरे एक दशक में दरिया के बीचोंबीच अवैध तरीके से खोदे गए बड़े-बड़े गड्ढे द्वारा पत्थर और रेत से भर गए है। जिससे अवैध तरीके से खनन करने वाले स्टोन क्रशर मालिकों खुदाई के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। लगभग यह हाल मग्गर खड्ड, सहार खड्ड, उज्ज दरिया, तरनाह नाला सहित अन्य बरसाती नालों का है। जहां धडल्ले से खनन की खोदाई की जा रही है, बल्कि इन बरसाती नालों के बीचोंबीच तैयार खनन सामग्री के ढेर स्थापित कर पानी के बहाव को भी प्रभावित कर रहे है।
रावी और उज्ज दरिया में नहीं है कोई आवंटित खनन ब्लॉक
पिछले कई महीनों से रावी और उज्ज दरिया के बीच खनन विभाग की ओर से कोई भी खनन ब्लॉक आवंटित नहीं है। इसके बावजूद भी अवैध तरीके से बेरोक खनन जारी है। अवैध तरीके से खनन करने में सबसे ज्यादा पंजाब के माफिया सक्रिय हैं जो राज्य की हदबंदी का फायदा उठाकर रात को भी खनन जारी रखे हैं और संबंधित विभाग सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बना हुआ है।