जरूरतमंदों को राशन पहुंचाते मीर चंद
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मेरे घर में आज का राशन है तो क्यों न उन घरों का चूल्हा जलाने में मदद करूं, जिनके सामने निवाले का संकट है। जिंदगी को लेकर पेशे से प्लंबर मीर चंद का यही फलसफा है। मीर चंद अपनी कमाई का महज 20 फीसदी अपने परिवार पर खर्च करते हैं और शेष 80 फीसदी आय को समाज सेवा में लगाते हैं। अपने गांव और आसपास के इलाकों में उन्हें समाजसेवी प्लंबर के नाम से जाना जाता है। रोजमर्रा की जिंदगी में वे जरूरतमंदों की मदद करते हैं। गांव में महिलाओं के लिए अपने खर्च पर शौचालय बनाने से लेकर बेहद गरीब परिवार के घर की छत बनाने में योगदान करके मीर चंद संतुष्ट महसूस करते हैं।
कठुआ जिले के छोटे से गांव बगियाल के रहने वाले 43 वर्षीय मीर चंद जरूरतमंद के लिए किसी भी समय हाजिर रहते हैं। बेहद गरीब हो, बेसहारा या फिर कोई जरूरतमंद, मीर चंद किसी ने किसी रूप में जरूरतमंद के काम आने की कोशिश करते हैं। इसके लिए पूरे गांव समेत आसपास के इलाकों में मीर चंद को नेक दिली के लिए जाना जाता है।
मीर चंद कभी किसी जरूरतमंद के पास राशन लेकर पहुंच जाते हैं तो किसी गरीब घर की बेटी की शादी में हाथ बटाने। उन्होंने अपने गांव में महिलाओं की जरूरत को समझते हुए शौचालय का निर्माण और पैसेंजर शेड भी तैयार करवाया। पास के गांव निहालपुर में एक गरीब परिवार को मकान की छत भी डालकर दी। मीर चंद के अनुसार दूसरों की मदद करने का सबक उन्हें माता-पिता से मिला है। अपने पांव पर खड़ा होकर इसकी शुरुआत की तो अजब सुकून मिला। उन्होंने बताया कि शादी होने के बाद दूसरों की मदद करने में कुछ दिक्कतें भी सामने आईं, लेकिन मदद के मिशन को नहीं छोड़ा।
ब्याज पर उधार लेकर भी दूसरों की मदद
मीरचंद का कहना है कि उनके लिए दूसरों की मदद जिंदगी का मकसद है, जिसे पूरा करने के लिए वह कई बार ब्याज पर उधार ले चुके हैं। कोरोना महामारी के दौरान हाईवे पर यात्रियों के लिए नाश्ते की व्यवस्था से लेकर प्रवासी मजदूरों को लखनपुर पहुंचाने के लिए गाड़ी की व्यवस्था करने में भी वे आगे रहे।