हीरानगर में सीमांत गांवों के विपीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सीमा पर लगातार
गोलाबारी के लिए भारत और पाकिस्तान दोनों को जिम्मेदार ठहराया है।
स्थापितों की स्थिति का जायजा लेने आई महबूबा ने कहा कि जनता को बुनियादी सुविधाएं देने के मामले में दोनों मुल्क कंगाल हैं। ताज्जुब की बात है कि गोला बारूद के लिए इतना पैसा कहां से आ जाता है?
सीमावर्ती इलाकों में यदि हालात खराब होते हैं तो दोनों मुल्कों के रक्षा मंत्रियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। हालात खराब होने पर सबसे पहले दोनों रक्षा मंत्रियों की कुर्सी जानी चाहिए।
विस्थापित परिवारों से मुखातिब महबूबा मुफ्ती ने हिंदी और पंजाबी के मिश्रण से दिए भाषण में कहा कि मोदी जी और नवाज शरीफ को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नुस्खे से हल खोजना चाहिए।
वाजपेयी की वजह से 2003 से वर्ष 2008 तक सीमा पर हालात शांत रहे। महबूबा ने कहा कि दोनों तरफ से बारूद का सैलाब आम नागरिकाें पर ही कहर ढाता है। आर-पार की लड़ाई की मांग बेतुकी है। मामला बातचीत से ही हल हो सकता है जिसके लिए दोनों मुल्कों को वाजपेयी की राह पर चलना होगा।
उन्होंने कहा कि रियासत में सैलाब आने से भारी नुकसान हुआ। उस पर ऐसे हालात का बनना दुर्भाग्यपूर्ण है। बार्डर यूनियन द्वारा उठाई गई मांगों पर महबूबा मुफ्ती ने कहा कि अगली सरकार किसकी होगी इसकी कोई गारंटी नहीं हैं लेकिन सीमावर्ती इलाकों को पांच मरला भूमि का प्लॉट दिलाने के लिए केंद्र सरकार से पुरजोर मांग की जाएगी।
इसी तरह से उन्होंने कहा कि मुफ्ती सरकार के दौरान सीमावर्ती इलाकों में विशेष भर्ती की गई। भविष्य में भी इसके लिए प्रयास होंगे। एलओसी और इंटरनेशनल बार्डर के हालात एक जैसे करार देते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि आरक्षण और अन्य तमाम सुविधाएं एक जैसी ही होनी चाहिए।
इसके लिए वह हर संभव प्रयास करेंगी। इस दौरान पीडीपी के प्रदेश, प्रांत और जिला स्तरीय पदाधिकारी भी मौजूद थे।