पहलगाम हमले के बाद से बदले हालात, कारोबारी बोले- व्यवसाय प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
बनी। हर साल अप्रैल महीने के शुरू होते ही जम्मू-कश्मीर का खूबसूरत सरथल इलाका पर्यटकों से गुलजार हो जाता था। पहाड़ों पर बर्फबारी का लुत्फ उठाने के लिए भारी संख्या में सैलानी इस क्षेत्र का रुख करते थे। लेकिन इस बार हालात कुछ अलग हैं। पहलगाम हमले के बाद से पूरे क्षेत्र में सन्नाटा पसरा हुआ है और पर्यटन व्यवसाय पर इसका गहरा असर पड़ा है। पर्यटक अब हिमाचल का रुख कर रहे हैं।
इस साल लोगों को उम्मीद थी कि पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा होगा, क्योंकि पहली बार सरथल तक पहुंचने वाली सड़क को सीमा सड़क संगठन की ओर से पूरी तरह से दुरुस्त कर दिया गया है। पहले जहां इस क्षेत्र तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता था, अब अच्छी सड़क सुविधा के चलते यह रास्ता काफी सुगम हो गया है। वहीं अब मोबाइल टॉवर भी स्थापित कर दिया गया है।
स्थानीय लोगों का मानना था कि सड़क के बेहतर होने और मोबाइल नेटवर्क की सुविधा मिलने से पर्यटन में भारी बढ़ोतरी होगी, जिससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। होटल मालिकों और टैक्सी चालकों को उम्मीद थी कि इस बार सीजन शानदार जाएगा। लेकिन पहलगाम हमले की वजह से सारे अनुमान धरे के धरे रह गए।
अरुण सिंह, जो एक स्थानीय होटल में काम करते हैं, बताते हैं कि कुछ हफ्ते पहले तक लोग बर्फ देखने के लिए सरथल आ रहे थे, लेकिन हमले के बाद पर्यटकों की संख्या में अचानक भारी गिरावट आई है। उन्होंने कहा, “गर्मी का यही सीजन होता है जब हमें उम्मीद होती है कि होटल फुल बुक रहेंगे। लेकिन इस बार हालात बिल्कुल उलट हैं। जहां पहले होटल के 16 में से 10 से 12 कमरे रोजाना बुक हो जाया करते थे, अब एक भी कमरा बुक नहीं हो रहा है।
टूरिज्म रिसेप्शन सेंटरों की भी स्थिति बेहद चिंताजनक है। बीते कुछ दिनों से एक भी पर्यटक इन केंद्रों तक नहीं पहुंचा है। होटल मालिकों का कहना है कि केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि टैक्सी चालकों और अन्य स्थानीय व्यापारियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। फिलहाल, सभी की उम्मीदें अब गर्मी के अगले चरण पर टिकी हैं। स्थानीय व्यवसायियों को विश्वास है कि जून, जुलाई और अगस्त के महीनों में जब गर्मी पीक पर होती है , तब पर्यटक दोबारा इस और रोक कर सकता है जिसे से क्षेत्र की रौनक फिर से बहाल होगी।