कठुआ। नगरी स्थित श्री माता बाला सुंदरी के प्रांगण में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन जारी है। रविवार को आयोजित कथा के दौरान संत सुभाष शास्त्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने कल्याण की प्राप्ति के लिए भक्ति का मार्ग अपनाने के लिए कहा।
शास्त्री जी ने कहा कि सद्गुरु की शरण में जाकर ज्ञान उपदेश तथा उनका आशीर्वाद लेकर भजन शुरू करें। क्योंकि, जीवन में इसके लिए और समय कब मिलेगा? काल की गति विचित्र होती है। जो कभी हरे-भरे वृक्ष थे, वह अब सूख गए। अत: समय मत गंवाओ। बार-बार परम ज्ञानी संत महापुरुषों के सत्संग की महिमा सुनाते हैं। ज्ञानी पुरुष पहले भी थे, आज भी हैं, और आगे भी होते रहेंगे। मुनि वशिष्ट, महाराज जनक, आदि बहुत से ऋषि, ब्रह्मर्षि, राजर्षि, ब्रह्मज्ञानी थे। यदि मानव ब्रह्म बोध प्राप्त कर ले, तो ब्रह्मज्ञानी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि ब्रह्म तो आप अभी भी हैं। ब्रह्म तो सभी में हैं। केवल ज्ञान होना शेष है। ब्रह्म ज्ञान हो जाए तो आप ब्रह्मज्ञानी हो जाते हैं। असल बात यह है कि हम चाहते हैं कि स्वयं ब्रह्मज्ञानी आत्म ज्ञानी हो जाएं। आप स्वयं दीपक होकर प्रकाश फैलाओ। इस स्थिति को प्राप्त करने की पहली सीढ़ी है, प्रभु के चरणों से प्रीति लगाना।