कठुआ। शहर की सबसे बड़ी सीवरेज परियोजना साढ़े तीन साल से कागजों तक ही सीमित रह गई है। अगस्त 2020 में बनी डीपीआर को आज तक अमली जामा नहीं पहनाया जा सका। लगभग साढ़े तीन साल पहले इस परियोजना को जल्द शुरू करवाने के दावे किए जा रहे थे लेकिन अब तक इसकी मंजूरी फंड के अभाव में नहीं मिल पाई है।
बता दें कि मौजूदा समय में शहर के सीवरेज समेत अन्य वेस्ट पानी से कठुआ खड्ड जा रहा है। इससे पानी दूषित हो रहा है। शहर के सभी 21 वार्डों में बसी सवा लाख की आबादी का वेस्ट पानी और सीवरेज मूनलाइट सिनेमा के पास और आंबेडकर ब्रिज के पास कठुआ खड्ड में गिर रहा है। इसी के निवारण के लिए इस परियोजना की डीपीआर बनाई गई थी। परियोजना सिरे चढ़ती तो सीवरेज, नालों के पानी के अलावा शहर में अक्सर जलभराव की समस्या से भी लोगों को छुटकारा मिल जाता लेकिन अभी तक इसकी मंजूरी नहीं मिलने से परियोजना आगे नहीं बढ़ पाई है।
जरा सी बारिश में डूब जाती हैं सड़कें, नाले रहते हैं ओवरफ्लो
सीवरेज न होने का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। निकासी के प्रबंध न के बराबर हैं। जरा सी बारिश से शहर की सड़कें बरसात के पानी में डूब जाती हैं। शहर के 70 फीसदी नाले ओवरफ्लो हो जाते हैं। नाले ओवरफ्लो की समस्या शहर की पुलिस लाइन रोड, वीआईपी रोड और जीडीसी के सामने की पॉश कॉलोनियों में भी रहती है। यहां तक कि जिला उपायुक्त और एसएसपी निवास के समक्ष भी नाला ओवरफ्लो की समस्या अक्सर देखी जाती है। अगर सीवरेज लाइन हो तो इन सभी समस्याओं का समाधान हो सकता है।
272 करोड़ किए जाने थे खर्च, अब बढ़ेगी लागत
इस परियोजना की डीपीआर अगस्त 2020 में बनाई गई। तब इसकी अनुमानित लागत 272 करोड़ रुपये थी। अब साढ़े तीन साल बीतने के साथ ही निर्माण सामग्री के दाम बढ़ चुके हैं। इससे डीपीआर में नक्शे तो वही रहेंगे लेकिन अनुमानित लागत में 10 से 20 फीसदी बढ़ोतरी होगी। योजना के मुताबिक मग्गर खड्ड हाईवे से लेकर सहार खड्ड तक सीवेरज बावलियों, वार्ड 12 और वार्ड 16 से वार्ड 18, वार्ड 2, वार्ड 21, वार्ड 10 और वार्ड 13 के आखिरी कोने से होता पूरे शहर के प्रत्येक घर, संस्थान, निजी एवं सरकारी कार्यालयों और फैक्ट्रियों का वेस्ट पानी इसी सीवरेज लाइनों से गुजरना था। यह चन्नग्रां में 54 कनाल में बनने वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में एकत्रित किया जाना था, जहां गंदे पानी को ट्रीट कर सिंचाई लायक बनाया जाना था। तब बताया गया था कि सिर्फ डीपीआर बनाने में ही एक साल से ज्यादा समय लगा था।
वर्ष 2053 तक प्रभावी रहती परियोजना
डीपीआर के मुताबिक इस परियोजना में 2.19 लाख मीटर लंबी सीवरेज लाइन बिछाई जानी थी। आगामी 2053 तक की आबादी के मद्देनजर इस डीपीआर को तैयार किया गया था। उक्त परियोजना से अगले 30 साल तक शहर में आबादी का वेस्ट संभालने की क्षमता दर्शाई गई थी। इस परियोजना के तहत शहर में छह बड़े सीवरेज कंपोनेंट बनाए जाने थे।
सरकार नहीं चाहती कठुआ का विकास हो : पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष
नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष नरेश शर्मा ने कहा कि उन्होंने एक साल मेहनत कर किसी तरह शहर की सीवरेज लाइन की डीपीआर तैयार करवाई थी, जोकि अभी भी सचिवालय में फंसी है। कठुआ को अगर विकसित शहरों की श्रेणी में लाना है तो यहां सीवरेज पहली जरूरत है। सीवरेज सुविधा के बिना शहर के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है लेकिन सरकार कठुआ का विकास नहीं चाहती। यही कारण है कि अभी तक इस डीपीआर को आगे नहीं बढ़ाया गया।
पीएमसी से अभी तक इस परियोजना की मंजूरी नहीं मिली है। फंड भी रिलीज नहीं हुआ। इसके चलते यह परियोजना अभी लटकी है। मंजूरी और फंड रिलीज हो तो परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है।
-सादिक हुसैन भट्टी, एईई अर्बन एन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट कठुआ
शहर के निचले इलाके में जहां भूमिगत जलस्तर 5 से 10 फीट ही है, वहां सीवरेज का अभाव जमीन के अंदर मौजूद पानी को भी दूषित कर रहा है। इससे लोग तरह-तरह के रोगों से ग्रस्त होते ही रहते हैं।
-योगराज शर्मा, निवासी वार्ड 2
-
शहर की बढ़ती आबादी को देखते हुए यहां सीवरेज सिस्टम कई साल पहले ही शुरू हो जाना चाहिए था। इसके बारे में कुछ साल पहले सुना जरूर था लेकिन वह आज तक बन नहीं पाया है, जबकि शहर को स्वच्छ रखने के लिए इसकी जरूरत है।
-प्रवीण गुप्ता, निवासी वार्ड 7