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भक्ति की शुरुआत ब्रह्मज्ञान से है : ज्योति प्रसाद

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संत निरंकारी भवन में आयोजित समागम में  प्रवचन करते महात्मा।  विज्ञ​प्ति
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संवाद न्यूज एजेंसी
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कठुआ। भक्ति पर्व के अवसर पर संत निरंकारी मिशन की ओर से कठुआ संत निरंकारी भवन के साथ शेरपुर गांव में धार्मिक समागम का आयोजन किया गया। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज के सानिध्य में हुए आयोजन में मिशन के ज्ञान प्रचारक ज्योति प्रसाद जी ने संगत का मार्गदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि साल के शुरुआत में ही हमें इस समागम के माध्यम से दाता ने भक्ति का अवसर दिया है। कई बार हम जब किसी ज्ञानवान व्यक्ति से पूछते हैं कि आपकी कितनी आयु है, तो वो कहता है कि जिस दिन से ज्ञान की प्राप्ति हुई, क्योंकि सही मायने में जिस दिन से ज्ञान प्राप्त किया वही जीवन जीवन है। बाकी का जीवन व्यर्थ ही चला गया। ज्ञान के बाद समर्पण करना है वहीं भक्ति है। भक्ति समय की पाबंद नहीं, सोते, खाते, चलते और संसार के कार्य करते हुए भी अगर ज्ञान ध्यान में है वही भक्ति है।
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उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी भी समारोह में जाने से पहले अपने आप को संवारने के लिए सुंदर जेवर पहनते हैं और बाद में संभाल के रख देते हैं। लेकिन ज्ञान रूपी जेवर को सदैव ही पहन कर रखना है। क्योंकि सही मायने में यही जेवर जीवन का शृंगार है। परमात्मा की जानकारी और इसका एहसास अंगसंग करना ही ज्ञानवान की निशानी है। परमात्मा कण-कण में है है जगह मौजूद है, यह तो बिना ज्ञान भी कह देते हैं। लेकिन उसे हर ओर देखना यह बिना ज्ञान के नहीं हो सकता। इसके लिए सतगुरु की शरण में जाना पड़ेगा।
अंत में संयोजक बीआर निरंकारी ने आए हुए मेहमान और भक्तजनों का आभार जताया। वाईपी शर्मा संचालक भी उपस्थित रहे।
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