-खरोट में पीएचसी चलता तो 15 हजार की आबादी मिलता स्वास्थ्य लाभ
-1.63 करोड़ में हुआ है निर्माण, करोना के बाद इस्तेमाल नहीं हुई
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के नाम पर खरोट गांव में बनाए गए नई प्राथमिक स्वास्थ्य केेंद्र (पीएचसी) की इमारत का लाभ क्षेत्र की आबादी को नहीं मिल रहा है। हालात यह हैं कि इस्तेमाल होने से पहले ही 1.63 करोड़ रुपये से बनी इमारत खंडहर हो गई है। यहां अस्पताल शुरू होता तो खरोट की पांच हजार लोगों सहित पडयारी, पुराना पिंड, परातां, मरोली, कलसपुर और मेहताबपुर 15 हजार आबादी को लाभ मिलता।
लंबे समय से खरोट पीएचसी तीन-चार कमरों में चल रहा है। यहां स्वास्थ्य के नाम पर सिर्फ बच्चों का टीकाकरण हो रहा है। लोगों की मांग पर सरकार ने वर्ष 2016 में यहां अस्पताल की इमारत बनाने के लिए राशि मंजूर की। वर्ष 2020 में इमारत की सुविधा मिली, लेकिन इसमें इलाज शुरू नहीं हो पाया। लोगों ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से इमारत खंडहर बनी है। कोरोना काल में यहां जिला प्रशासन ने कोरेंटाइन केंद्र बना दिया। इसके बाद लोगों ने खिड़कियों के शीशे तोड़ दिए और शौचालय में लगे नल तक नहीं छोड़े।
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खस्ताहाल इमारत लेने से स्वास्थ्य विभाग ने कर दिया मना
कोरोना काल से पहले बनी इमारत स्वास्थ्य विभाग को सौंपी जानी थी, लेकिन यहां कोरेंटाइन केंद्र बनने से इमारत खस्ताहाल हो गई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसे लेने से मना कर दिया। ठेकेदार का कहना है कि उसने तो इमारत सही बनाई है। इसके खस्ता होने के लिए जिला प्रशासन जिम्मेदार है।
लोक निर्माण विभाग ने निर्माण के बाद इमारत स्वास्थ्य विभाग को सौंप दी है। यहां स्वास्थ्य विभाग का ही समान पड़ा है। चाबी भी स्वास्थ्य विभाग के पास है। अगर इमारत को नुकसान हुआ है तो इसका जिम्मदार खुद स्वास्थ्य विभाग है।
-अविनाश गुप्ता, सहायक कार्यकारी अभियंता, लोक निर्माण विभाग कठुआ