जम्मू-पठानकोट से जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे को जोड़ने के लिए सिक्स लेन का एक वैकल्पिक हाईवे बनाया जाएगा। इसके लिए एनएचएआई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर रहा है। उम्मीद है कि अगले वर्ष तक काम शुरू हो जाएगा। इससे सांबा से मानसर और उधमपुर होते हुए घाटी के लिए सुगम और कम दूरी वाला बेहतर मार्ग मिल जाएगा। यह मार्ग स्थानीय लोगों के साथ ही सामरिक रूप से भी अहम साबित होगा।
इस मार्ग को सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की ओर से 1971 के भारत-पाक युद्ध से ठीक पहले तैयार किया गया था। अब लगभग 55 वर्ष बाद इसे नेशनल हाईवे के रूप में विकसित करने की तैयारी है। उधमपुर में गोला-बारूद का डिपो था। इस कारण उसे जम्मू के रास्ते लाना सही नहीं था। हाईवे लगातार पाकिस्तान की नजरों में था। लिहाजा इस सड़क का निर्माण शुरू किया गया।
लंबे समय तक बीआरओ की देखरेख में रहने के बाद इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी जम्मू-कश्मीर सरकार के लोक निर्माण विभाग को सौंप दी गई। इस कारण सड़क की हालत साल दर साल खस्ता होती गई। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से बीआरओ ने इस सड़क की जिम्मेदारी फिर से संभाल ली है। जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे पर सांबा से शुरू होकर उधमपुर के जखैनी तक प्रस्तावित इस वैकल्पिक नेशनल हाईवे से घाटी का सफर लगभग 44 किलोमीटर कम हो जाएगा।
इसका सीधा लाभ घाटी जाने वाले मालवाहक वाहनों और पर्यटकों को होगा। इसके साथ ही मानसर और सुरूइंसर जैसे इलाके भी पर्यटन के लिहाज से और समृद्ध होंगे। इससे यहां रोजगार के साधन बढ़ेंगे और हाईवे का विस्तार होने से यह इलाका भी शहरी क्षेत्रों के साथ सीधा जुड़ जाएगा।
इससे पहले भी तैयार हुई थी डीपीआर
सांबा-मानसर-उधमपुर सड़क को हाईवे बनाने के लिए इससे पहले भी डीपीआर तैयार की गई थी। इसमें 8.5 किलोमीटर लंबी सुरंगों का निर्माण, पांच बड़े और 15 छोटे पुल बनाने का प्रस्ताव शामिल था। मौजूदा 61 किलोमीटर लंबी सांबा-मानसर-उधमपुर सड़क को मानसर होते हुए उधमपुर के जखैनी इलाके तक बनाना था। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से मंजूरी न मिलने से पुरानी डीपीआर अब समय के साथ लागत मूल्य बढ़ने से काम की नहीं रही।