गांव सकता चक में पानी निकासी वाले नाले को बंद किए जाने के विरोध में शनिवार को ग्रामीणों का गुस्सा जिला प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा। लोगों ने जिला सचिवालय में आकर नारेबाजी करते हुए कहा कि गांव का ही एक व्यक्ति बार-बार नाला बंद करता है। प्रशासन ने आज तक इसका कोई हल नहीं निकाला है।
लोगों ने कहा कि अगर ऐसा ही रहा तो उन्हें मजबूरन उग्र रुख अपनना पड़ेगा। प्रदर्शनकारियों में शामिल बसपा नेता सोमराज मजोत्रा ने बताया कि गांव में हजारों की आबादी है। पूरे गांव का पानी गांव के पक्के नाले से बाहर जाता है, लेकिन गांव के ही एक व्यक्ति द्वारा बार-बार नाले में कभी मिट्टी डालकर तो कभी पत्थर डालकर नाला बंद कर दिया जाता है।
इसके कारण नाले का पानी गलियों में भर जाता है। गलियां तालाब में तबदील हो जाती हैं। प्रदर्शनकारियों में शामिल कृष्ण चंद, बिशंबर दास, प्रशोत्तम दास ने कहा कि उस व्यक्ति के साथ ग्रामीणों ने कई बार बात की है, लेकिन उसने कभी भी लोगों की बात नहीं मानी। उल्टा लोगाें के साथ ही अभद्र व्यवहार करता है।
लोगों ने कहा कि इसके बाद स्थानीय प्रशासन से भी शिकायत की और प्रशासन ने नाले को खुलवाया था, लेकिन अब फिर से नाला बंद कर दिया गया है। लोगों ने कहा कि अगर ऐसा ही रहा तो लोगों का घरों से निकलना भी दूभर हो जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अगर नाला नहीं खुलवाया गया तो वह उग्र रुख अपना लेंगे।