अंतरराज्यीय बसों को प्रदेश में दाखिल होने की अनुमति न देने पर बुधवार को यात्रियों का गुस्सा फूट पड़ा। इस दौरान लखनपुर कॉरिडोर के नजदीक हाईवे को जाम करते हुए डेढ़ घंटे तक प्रदर्शन किया गया। मौके पर पहुंचे लखनपुर थाना प्रभारी संजीव चिब ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर हाईवे खुलवाया। प्रदर्शन में शामिल यात्री ओवैस अहमद ने कहा कि देश भर में जहां अंतरराज्यीय परिवहन को अनुमति दे दी गई है, वहीं जम्मू-कश्मीर में बसों को अनुमति न दिए जाने से आए दिन लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बिलाल अहमद ने कहा कि दिल्ली से जिस बस में वह जम्मू-कश्मीर के लिए चले, उसे लखनपुर से आगे नहीं जाने दिया जा रहा है। लोगों को लखनपुर से सरकारी बसों के जरिए जाने को मजबूर किया जा रहा है। इन सरकारी बसों में न तो सामाजिक दूरी का पालन किया जा रहा है और न ही बसों को सैनिटाइज किया जा रहा है। मंजूर अली ने बताया कि वे दिल्ली से स्लीपर बस में जम्मू का किराया देकर आ रहे हैं। लेकिन जैसे ही गाड़ी सुबह 4 बजे के आसपास लखनपुर टोल प्लाजा के समीप पहुंची, तो पुलिस वालों ने गाड़ी को आगे जाने से रोक दिया और यात्रियों को एसआरटीसी बस में बैठकर आगे सफर करने को कहा। सरकारी बसों में क्षमता से अधिक 60 सवारियां भेड़ बकरियों की तरह भरी जा रही थीं। यात्री परवेज अहमद, शौकत अली, अजीम अहमद, रूप सिंह, काबल सिंह, पुरुषोत्तम कुमार और जुगल किशोर ने भी इस तरह की व्यवस्था पर रोष जताया।
बस वालों पर सख्ती से नाराजगी
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि निजी वाहनों से आने वालों के लिए लखनपुर में सख्ती न के बराबर है, जबकि बसों में सफर करने वालों को कोरोना जांच के नाम पर परेशान किया जा रहा है। जांच करवाने के बाद भी उन्हें बिना सैनिटाइज की हुई बसों के अलावा अन्य सवारियों के साथ बैठकर जाना पड़ता है। यदि ऐसा ही करना है, तो कोरोना जांच आखिर क्यों और जिस बस में वो सफर कर आ रहे हैं उसे प्रदेश में आने की अनुमति आखिर क्यों नहीं। उन्होंने कहा कि कोरोना जांच के नाम पर परेशान किया जा रहा है।
एक माह से लखनपुर कॉरिडोर में एक भी संक्रमित नहीं
हैरत की बात है कि जहां लखनपुर में कोरोना रोकथाम के लिए जम्मू-कश्मीर प्रशासन की ओर से प्रतिबंध लगाए गए हैं, वहीं पिछले एक महीने से लखनपुर के रास्ते आए यात्रियों या पर्यटकों में से एक भी व्यक्ति संक्रमित नहीं पाया गया। औसतन चार से छह हजार लोगों की जांच प्रतिदिन लखनपुर कॉरिडोर में की जा रही है। पांच सौ से अधिक कर्मचारियों के साथ साथ अधिकारियों की ड्यूटी भी लखनपुर कॉरिडोर में लगाई गई है। प्रदेश में इक्का दुक्का सामुदायिक संक्रमण के मामलों के रिपोर्ट होने के बाद भी प्रतिबंध सिर्फ लखनपुर कॉरिडोर पर ही रखे गए हैं।