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जब्त किए ट्रक का चालक मृत मिला, पुलिस पर हत्या का आरोप

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कठुआ। डिंगा अंब क्षेत्र में संदिग्ध अवस्था में मृत मिले 26 वर्षीय ट्रक चालक की मौत के लिए परिजनों ने पुलिस को जिम्मेदार ठहराते हुए शव ले जाने से इंकार कर दिया है। रविवार को पुलिस की सूचना मिलने के बाद जीएमसी कठुआ पहुंचे परिजनों ने पुलिस पर उसकी हत्या का आरोप लगाया। कहा, हिरासत में टॉर्चर किया गया और अब दुर्घटना दिखाने की कोशिश की जा रही है। परिजन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे। जिसके चलते दिनभर चली कशमकश के बावजूद पोस्टमार्टम नहीं हो सका।
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जीएमसी कठुआ पहुंचे मृतक ट्रक चालक के चाचा गुरमेज सिंह ने बताया कि गत 22 दिसंबर को डिंगा अंब पुलिस ने अमृतसर से चले ट्रक नंबर एनएल02 एन-9682 को पशु तस्करी के आरोप में जब्त किया था। तब से ही ट्रक चालक अमनदीप सिंह पुत्र मेजर सिंह निवासी रायपुर कला अमृतसर लापता था। 25 दिसंबर को हीरानगर पुलिस के एक एएसआई ने उन्हें फोन कर ट्रक चालक के हिरासत में होने की बात बताई। इसके बाद वह जब वह डिंगा अंब पहुंचे तो एएसआई ने चालक को रिहा करने के बदले लाखों रुपए रिश्वत की मांग की।
गुरमेज ने बताया कि अपने भतीजे को छुड़वाने के लिए जब वह हीरानगर पुलिस थाना प्रभारी से मिले तो उन्होंने इस मामले में किसी की गिरफ्तारी होने से इनकार कर दिया और ज्यादा जानकारी के लिए थाने के मुंशी के पास भेज दिया। वहां से भी उन्हें अपने भतीजे की कोई विश्वस्त जानकारी नहीं मिली और हर बार एएसआई से बात करने पर पैसे देने की मांग की गई। उन्होंने बताया कि शनिवार को व्हाट्सएप से उक्त एएसआई ने ही उसके भतीजे का शव मिलने की बात कही। साथ ही शव के फोटो भी भेजे थे। इसकेबाद वह लोग आनन-फानन कठुआ पहुंचे हैं।
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सुलगते सवाल
गुरमेज ने कहा कि पुलिस कह रही है कि नाके के दौरान फरार होने के प्रयास में अमनदीप की फिसल कर मौत हो गई थी। अगर ऐसा है तो 13 दिन बीत जाने के बाद मिला शव खराब क्यों नहीं हुआ। वहीं बार-बार पैसे की मांग किया जाना और बाद में मौत की सूचना देना इस बात का सबूत है कि हिरासत के दौरान दी गई यातना से ही उसकी मौत हुई है। अब पुलिस उसकी मौत से पल्ला झाड़कर इसे दुर्घटना का मामला बनाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पुलिस हत्या का केस दर्ज नहीं करती तब तक वह शव नहीं ले जाएंगे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगा मामला दर्ज : एसएसपी
वहीं इस संबंध में एसएसपी कठुआ डॉ. शैलेंद्र मिश्रा का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में है। रविवार को परिजनों को बुलाया गया था, ताकि पोस्टमार्टम के बाद उसका शव उनके हवाले किया जा सके। अगर परिजनों को किसी भी प्रकार की आशंका है तो पोस्टमार्टम के बाद डॉक्टरों की प्राथमिक रिपोर्ट के बाद ही मामला दर्ज किया जा सकता था, लेकिन परिजन सहयोग करने के बजाय वहां से चले गए हैं। नियमों के अनुसार शव 72 घंटे पुलिस कस्टडी में रखा गया है और परिजनों के जवाब का इंतजार है।
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