ज्वाइंट एक्शन कमेटी (आल जेके जनरल कैटेगरी और बिरादरी) ने रविवार को महारैली का आयोजन कर पदोन्नति में आरक्षण का विरोध किया।
शहीद भगत सिंह पार्क में एकत्रित हुए विभिन्न सभाओं और बिरादरियों के सदस्यों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मंत्रियों के सामने भी आरक्षण विरोधी नारे लगाए।
प्रदर्शनकारियों ने हाईकोर्ट के फैसले को जल्द लागू करने की मांग भी की और कहा कि सोमवार को उच्चतम न्यायालय में होने वाली सुनवाई उनके हक में होगी।
रैली शहीद भगत सिंह पार्क से आरंभ होकर शहीदी चौक से होते हुए मुखर्जी चौक पर जाकर समाप्त हुई। रैली से पूर्व आयोजित विरोध बैठक में ज्वाइंट एक्शन कमेटी के राज्य प्रधान डॉ. रत्नागर शर्मा ने कहा कि हाईकोर्ट ने जो फैसला दिया है वह पूरे समाज के हित में है।
उन्होंने कहा कि संविधान को तोड़ मरोड़कर राजनेताओं ने अपने लाभ के लिए आरक्षण को अपने वोट बैंक का जरिया बना लिया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले पर वह उच्चतम न्यायालय में भी अपील दायर कर चुके हैं और सोमवार को इसकी सुनवाई भी होगी।
उन्होंने कहा कि यदि राज्य सरकार ने फौरन इस फैसले को लागू नहीं किया तो आने वाले दिनों में उग्र विरोध का सामना सरकार को करना होगा। इस मौके पर जिला कठुआ की कमेटी के प्रवक्ता अंकुर शर्मा ने कहा कि पदोन्नति में आरक्षण का मतलब आरक्षण में आरक्षण देना है।
यह आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 14, 15 व 16 का विरोध करता है। ऐसे में सरकार को इसे संविधान का हक कहने की गलती नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण समर्थन करने वाले लोगों के विरोध में वह नहीं है, लेकिन संविधान को तोड़कर उसे अपने हित के लिए इस्तेमाल करने की इजाजत कमेटी नहीं देगी।
उन्होंने कहा कि किसी एक वर्ग के विकास के लिए दूसरे वर्ग को विकास से दूर करना सही नहीं है। ऐसे में जब तक सरकार कोर्ट के फैसले को लागू नहीं करेगी वह संघर्ष करते रहेंगे। रैली में विभिन्न सभाओं और बिरादरियों के सदस्यों ने भी हिस्सा लिया।
पदोन्नति में आरक्षण के विरोध में उतरे लोगों के सवालों पर राज्य ने दो-दो मंत्रियों ने कन्नी काटे रखी। समाज कल्याण मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री इस मसले पर कुछ भी साफ-साफ बोलने से बचते नजर आए।
शहीद भगत सिंह पार्क के सामने से अपने वाहन में जा रहे स्वास्थ्य मंत्री चौधरी लाल सिंह से जब ज्वाइंट एक्शन कमेटी के सदस्यों ने सवाल करना चाहा, तो उससे पूर्व ही मंत्री ने कह दिया कि वे इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे।
बाली भगत ने कहा कि कोर्ट के फैसले पहले भी आते रहे हैं और उनमें संशोधन किया गया है। ऐसे में संसद किसी भी कोर्ट से ऊंची है।