हेड रेस टनल के क्षतिग्रस्त होने से बंद एनएचपीसी की सेवा दो परियोजना 31 मार्च तक के लिए बंद कर दी गई थी। वहीं अब इस परियोजना के इस वर्ष के अंत तक फिर शुरू होने का अनुमान है। दस्तावेजी प्रक्रिया, आकलन और मंजूरी मिलने के बाद टेंडर जारी किए गए थे, जिसके बाद हेड रेस टनल की मरम्मत के लिए एनएचपीसी की ओर से वेनरेस कंस्ट्रक्शन कंपनी को काम सौंपा गया है। परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि ठेकेदार ने काम शुरू कर दिया है। मशीनरी आदि पहुंच चुकी है। इस वर्ष के अंत से पहले इस परियोजना के फिर से शुरू होने की उम्मीद है।
नई एलाइनमेंट पर टनल की खुदाई में ड्रिलिंग के साथ-साथ ब्लास्टिंग का काम किया जाना है। ऐसे में विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। वहीं कंपनी को इसके लिए आठ माह का समय दिया गया है। इसे परखने के बाद एनएचपीसी की ओर से एक बार फिर जलाशय को भरा जाएगा। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो बिजली उत्पादन न होने से जहां तीन सौ करोड़ से अधिक के नुकसान का अनुमान है वहीं एचआरटी पर आने वाले खर्च अतिरिक्त हैं।
गर्मी में इस बार 120 मेगावाट की सेवा परियोजना के ठप होने से कई राज्यों में बिजली संकट गहराने के आसार हैं। जम्मू-कश्मीर को भी 23 मेगावाट बिजली उत्पादन की कमी का सामना करना पड़ेगा। अधिक नुकसान कठुआ जिले को झेलना पड़ेगा। गर्मी में पीक समय पर सेवा परियोजना से बिजली हासिल की जाती रही है।
25 सितंबर 2020 को भूस्खलन से हुआ नुकसान
25 सितंबर 2020 की देर शाम भूस्खलन के चलते सेवा परियोजना की हेड रेस टनल में से पानी का बहाव सेवा नदी की तरफ हो गया था। टनल के एडिट-दो में तैनात एनएचपीसी कार्मिक एवं स्थानीय निवासियों की सूचना पर अधिकारियों की एक टीम ने घटनास्थल का जायजा लिया। प्रभावित स्थल के आसपास के निवासियों को भी नुकसान वाली जगह से दूर रहने को कहा गया है। 26 सितंबर को परियोजना के महाप्रबंधक बेदी राम ने वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम के साथ घटनास्थल का जायजा लिया, जिसमें पाया कि एडिट-दो से बांध परिसर की तरफ 300 से 400 मीटर तक के स्थान के पास सेवा-दो पावर स्टेशन की हेड रेस टनल का बड़ा हिस्सा बह चुका है। यह मामला एनएचपीसी से संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया और मुख्यालय से इंजीनियरिंग भूविज्ञान, डिजाइन व इंजीनियरिंग, संचालन एवं रखरखाव और परियोजना जांच प्रभागों के विशेषज्ञों की एक टीम घटना के अगले दिन मौके पर पहुंची। इसके बाद से आकलन जारी है। एनएचपीसी के अधिकारियों ने बताया कि एचआरटी का लगभग 100 मीटर का हिस्सा बह चुका है। इसके परिणामस्वरूप, पावर स्टेशन को बंद करना पड़ेगा। इसके बाद जलाशय को भी खाली कर दिया गया। पिछले छह माह से यह परियोजना ठप पड़ी है।