वक्ताओं ने 1886 में शिकागो में मजदूरों की ओर से किए गए संघर्ष को याद किया
कठुआ। मढ़ीन के ढैया चक में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने 1886 में शिकागो में मजदूरों की ओर से किए गए संघर्ष को याद किया, जिसने आठ घंटे कार्यदिवस की मांग को लेकर इतिहास रचा था।
मजदूरों ने अधिकारों के लिए एकजुटता बनाए रखने और शोषण के खिलाफ आवाज उठाने के संकल्प के साथ शुरू होने वाले कार्यक्रम में हरी सिंह ने केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार ने 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नए श्रम संहिताएं लागू की हैं, जो मजदूर वर्ग के लिए प्रतिकूल हैं और कॉर्पोरेट्स को श्रमिकों के शोषण का अधिकार देती हैं।
वहीं, मजदूरों ने श्रम संहिताओं के खिलाफ नारेबाजी करते हुए 8 की बजाय 12 घंटे कार्य दिवस को अस्वीकार किया और इसे मजदूरों के शोषण की नीति बताया। उन्होंने सभी ठेका कर्मचारियों, दैनिक वेतनभोगियों, आवश्यकताधारित श्रमिकों और अस्थायी कर्मचारियों के स्थायीकरण की मांग की। इसके साथ ही बिल्डिंग एंड अदर्स कंस्ट्रक्शन वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड को अधिक प्रभावी बनाने की मांग उठाई गई। वक्ताओं ने 20 मई, 2025 को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की ओर से घोषित हड़ताल में भाग लेने का आह्वान किया।
इस मौके पर बनारसी दास, सेवा राम, जीत कुमार, सोम राज, कुलदीप कुमार और सुधेश कुमार समेत अन्य नेताओं ने विचार व्यक्त किए। उधर, बरनोटी स्थित मेगा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड में मजदूरों ने कार्यक्रम का आयोजन किया। यहां ध्वजारोहण करने के बाद मई दिवस के शहीदाें को श्रद्धांजलि दी गई।