पहाड़ों पर बर्फबारी से बढ़ी ठड़ के बाद खानाबदोशों का पलायन तेज हो गया है। बुधवार को जिला पहाड़ी इ?
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कठुआ/बिलावर। प्रदेश में सचिवालय की तरह हर साल लगभग 20 फीसदी आबादी अपने आवास बदलती है। पहाड़ों पर मौसम की पहली बर्फबारी के बाद गुज्जर बकरवाल समुदाय का पहाड़ों से मैदानों की ओर पलायन तेज हो गया है। बनी, बसोहली और बिलावर के इलाकों से बड़े पैमाने पर पारंपरिक रूट से इन समुदायों के लिए अपने काफिले के साथ मैदानों को कूच करते दिखाई दे रहे हैं।
गुज्जर बकरवाल समुदाय का साल में दो बार बड़े पैमाने पर प्रदेश में होने वाला पलायन लाव लश्कर के साथ चलता है। वहीं इनके रूट पर संबंधित विभाग विभिन्न जगह चेक पोस्ट और चिकित्सालय भी स्थापित करता है। विभागीय अमला भी तैनात रहता है। जाने से पहले इन्हें दस्तावेजी कार्रवाई भी पूरी करनी पड़ती है। इस काफिले के साथ भेड़ पालन, पशुपालन और वन विभाग का भी बराबर तालमेल रहता है।
कठुआ डिवीजन में ही कुल 69 कुनबों को वन विभाग हर साल विभिन्न 35 कंपार्टमेंटों में भूमि अलॉट करता है। इसके लिए कुल भूमि रकबे में से 1691 हेक्टेयर अलॉट की जाती है। इन चरागाहों को गर्मियों में इस्तेमाल करने के बाद खानाबदोश मैदानों में लौट आते हैं। इनके एक एक काफिले में सैकड़ों भैंस, भेड़ और बकरियां शामिल होती हैं।
आंकड़े बताते हैं कि हर साल हजारों की तादाद में समुदाय के सदस्य गर्मियों में कारगिल से लेकर उधमपुर और कठुआ तक अस्थायी रूप से पलायन करते हैं और अक्तूबर महीने के अंत तक लौट जाते हैं।