रामकोट। कसबा रामकोट में 1926 में खुली स्वास्थ्य विभाग की डिस्पेंसरी 1987 में अपग्रेड होकर प्राथमिक उपचार केंद्र बनी, लेकिन डेढ़ दशक से कस्बे के इस अस्पताल में सुविधाओं की दरकार है। एंबुलेंस तक नहीं है। एक्स-रे मशील है, लेकिन ऑपरेटर नहीं। हालांकि कस्बे के आसपास कई गांवों में सब सेंटर और डिस्पेंसरियां खुली हैं, लेकिन अभी भी इस उपचार केंद्र में रोजाना 100 से ज्यादा ओपीडी है। स्टाफ की भी भारी कमी होने से मरीजों को नीम हकीमों का सहारा लेना पड़ता है। इस स्वास्थ्य केंद्र में एंबुलेंस को करीब छह माह पहले विभाग ने वापस बुला लिया था, उसकी जगह प्राथमिक उपचार केंद्र उच्चा पिड से एक खराब एंबुलेंस को यहां अटैच कर दिया गया। इसकी कई बार मरम्मत करवाई गई, लेकिन एक साल से यह एंबुलेंस फिर से खराब पड़ी है, जिसे न ही विभाग उठा रहा है और न ही इसकी मरम्मत करवाई जा रही है। एंबुलेंस न होने से मरीजों निजी वाहन में ले जाना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने विभाग से प्राथमिक उपचार केंद्र में नई एंबुलेंस उपलब्ध करवाने की मांग की है। सरपंच प्रदीप सिंह का कहना है कि उन्होंने बीएमओ बिलावर के माध्यम से सीएमओ कठुआ को कई बार समस्या से अवगत करवाया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई है।
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छलां चौक पर हाई मास्क लाइटें बनीं शोपीस
रामकोट। रामकोट के छलां चौक पर लगी हाई मास्क लाइटें बीते चार साल से खराब पड़ी हैं, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरपंच जोगिंदर कुमार ने बताया कि टूरिज्म विभाग द्वारा चार साल पहले चौक पर लाइटें लगाई गई थीं, लेकिन अभी तक जली नहीं। उन्होंने बताया कि विभिन्न चौराहों में हाई मास्क लाइटें खराब हैं, लेकिन इन्हें ठीक नहीं किया जा रहा। लोगों ने जल्द खराब लाइटों को ठीक करने की मांग की है। संवाद