प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन द्वारा रविवार को एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन के दौरान जिला के विभिन्न प्राइवेट स्कूलों के प्रिंसिपलों और चेयरमैन ने उपस्थिति दर्ज करवाते हुए सरकार पर प्राइवेट स्कूलों को बंद करवाने की साजिश करने का आरोप लगाया।
इसके साथ ही मांग करते हुए कहा कि किसी भी फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए प्राइवेट स्कूल संचालकों को भी शामिल किया जाए। सम्मेलन में एसोसिएशन के प्रांतीय प्रधान कमल गुप्ता ने कहा कि वर्तमान में राज्य सरकार प्राइवेट स्कूलों को सरकारी स्कूलों के मुकाबले कम समझती है।
ऐसे में सरकार प्राइवेट स्कूलों को बंद करने के लिए बार-बार विभिन्न प्रकार के आदेश जारी कर रही है। कई बार फीस, कई बार स्कूल की इमारत तो कई बार स्कूल बसों को लेकर सरकार उन्हें प्रताड़ित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों को अव्वल बताने की होड़ में सरकार ऐसे आदेश जारी कर रही है जो किसी भी सूरत में पूरे नहीं हो सकते हैं।
इस मौके पर जिला प्रधान जीएस काटल ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों को सरकार ने हाशिए पर रखा है और कभी भी स्कूलों को लेकर किए जाने फैसलों में उन्हें शामिल नहीं किया। उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में पांच हजार से अधिक प्राइवेट स्कूल हैं, लेकिन सरकार उन्हें कभी भी किसी प्रकार के फैसले लेने से पूर्व बैठकों में शामिल नहीं करती।
सरकार केवल बंद कमरों में बैठकर फैसले करती है और उसे प्राइवेट स्कूलों को मानने के लिए बाध्य करती है। इस मौके पर एसोसिएशन ने एक स्वर में फैसला करते हुए कहा कि यदि सरकार ने इस प्रकार का रवैया जारी रखा तो आने वाले समय में सभी स्कूलों के प्रिंसिपल सड़कों पर उतर आऐंगे।