दिवाली पर इस बार चले पटाखों के अलावा फसलों की कटाई, छटाई, पंजाब में पराली जलाने का प्रभाव शहर की फिजा पर पड़ा है। छोटी और बड़ी दीवाली की रात शहर में पीएम 10 की मात्रा 130 और 145.2 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया। जबकि सामान्य तौर पर इसे सौ माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर से कम होना सही माना जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर दमा या फिर श्वास रोग से पीड़ितों में देखने को मिला।
आईआईडी औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण कमेटी के मापक यंत्रों में पीएम 10 की मात्रा हालांकि छोटी दिवाली को सौ माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर और दीपावली को 121 माइक्रोग्राम तक दर्ज की गई है।
शहर में ट्रैफिक के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पटाखों के चलने और औद्योगिक क्षेत्र के नीचे बसी कॉलोनियों से प्रदूषण के आंकड़े चिंताजनक हुए हैं। ऐसा तब है जबकि आईआईडी सेंटर गोविंदसर और कठुआ शहर के वन विभाग कार्यालय में स्थापित मॉनिटरिंग स्टेशन केवल पीएम 10 और पीएम 2.5 की मात्रा के आंकड़े ही एकत्रित कर रहे हैं। उसपर भी बड़ी और छोटी दीपावली की रात वन विभाग कार्यालय परिसर में स्थापित मॉनिटरिंग स्टेशन में पीएम 2.5 के आंकड़े सैंपलर के न चलने की वजह से एकत्रित नहीं हो पाए।
जीएमसी कठुआ के विशेषज्ञ डॉ. मानिक महाजन ने बताया कि मौसम में हो रहे बदलाव से पिछले कुछ दिनों में दमे के रोगियों में दिक्कत बढ़ी हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्ष में कठुआ औद्योगिक क्षेत्र और इससे सटे इलाकों में दमा रोगियों की संख्या काफी बढ़ी है। रूटीन में आने वाले मामलों की केस हिस्ट्री से पता चलता है कि गोविंदसर, हटली मोड़ और खास तौर से औद्योगिक क्षेत्रों के भीतर रहने ओर समय बिताने वाली आबादी में दमा रोगी बढ़ रहे हैं।