श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट में आरक्षण नीति का बचाव करने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) सरकार की सियासी दलों ने आलोचना की। यह आरक्षण नीति विभिन्न वर्गों को 70 फीसदी कोटा प्रदान करती है।
जम्मू-कश्मीर के समाज कल्याण विभाग ने हाईकोर्ट में एक हलफनामा प्रस्तुत किया है। इसमें कहा गया है कि रिट याचिका तुच्छ प्रकृति की है और इसे न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के इरादे से दायर किया गया है। सरकार ने जहूर अहमद भट और अन्य बनाम यूटी ऑफ जेएंडके शीर्षक वाली याचिका को खारिज करने की मांग की है। यह हलफनामा तब आया है जब सरकार ने नीति पर विरोध के बाद आरक्षण के मुद्दे पर विचार करने के लिए समाज कल्याण मंत्री सकीना इट्टू की अध्यक्षता में एक कैबिनेट उपसमिति का गठन किया है।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विधायक वहीद पर्रा ने कहा कि कैबिनेट उपसमिति कुछ नहीं, बल्कि जनता को गुमराह करने का दिखावा है। पर्रा ने एक्स लिखा, प्रदेश सरकार अब न्यायालय में आरक्षण नीति में गहरी खामियां होने का बचाव कर रही है। वे रिट याचिका को आधारहीन बताकर खारिज करने की कोशिश कर रहे हैं, जो जम्मू-कश्मीर में मेधावी छात्रों के भविष्य को बर्बाद करने का एक और प्रयास है। पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन ने कहा कि सरकार ने अपने हलफनामे में कैबिनेट उपसमिति के गठन का उल्लेख नहीं किया है। लोन ने कहा, यह एक कानूनी रहस्य है। ऐसा लगता है कि सरकार अपनी समिति को अपने कानूनी हलफनामे में उल्लेख करने लायक गंभीरता से नहीं ले रही है। ब्यूरो