पानी और बिजली आपूर्ति सुचारु न होने पर सीमावर्ती गांवों के लोगों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं न होेने पर सीतावर्ती ग्रामीणों ने भाजपा के नेतृत्व में रविवार को प्रदर्शन किया। उन्होंने राज्य सरकार पर सीमावर्ती ग्रामीणों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।
हीरानगर मंडल कार्यालय के बाहर एकत्रित होकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि वर्तमान में तहसील के बार्डर क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है और बार-बार मांग करने के बावजूद भी सरकार सुध नहीं ले रही है।
प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व करते हुए मंडल प्रधान अश्वनी शर्मा ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में बिजली-पानी के साथ सड़कों और अन्य सुविधाओं का अकाल है। कई बार आतंकवाद के कारण लोग अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हुए हैं और सीमांत क्षेत्रों की ओर सरकार की रुख ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि बीएडीपी योजना हो या फिर अन्य किसी राशि के द्वारा सीमांत क्षेत्रों का विकास करना हो सरकार ने भेदभाव ही किया है। उन्होंने कहा कि सीमांत लोग बार-बार सरकार की अनदेखी के कारण परेशानियों से जूझ रहे हैं।
इस मौके पर करण कुमार ने कहा कि भेदभाव की नीति को सरकार को छोड़ना चाहिए, लेकिन सरकार ने अब तक अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार से सीमांत लोग कई बार सुविधाएं देने की मांग कर चुके हैं, लेकिन ऐसा अब तक नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने यदि जल्द ही भेदभाव बंद नहीं किया तो सरकार के खिलाफ उग्र रुख अपनाया जाएगा और सीमांत लोगों को साथ लेकर वह सड़कों पर उतरेंगे। इस मौके पर मुकेश पाधा, कुलदीप राज, रघुवीर सिंह आदि उपस्थित रहे।