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सुरंग खोदने के लिए पाकिस्तान ने तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली

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कठुआ/हीरानगर। गणतंत्र दिवस से ठीक पहले अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक और सुरंग मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। सुरंग को देखकर लगता है कि पाकिस्तान ने इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली है। बीएसएफ के अधिकारी पूरे इलाके पर नजर बनाए हुए हैं।
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बीएसएफ के आईजी एनएस जमवाल ने बताया कि सुरंग की प्रारंभिक जांच में पता चलता है कि इसे खोदने से पूर्व जगह के चयन से लेकर मिट्टी की जांच तक की गई होगी। यह बेहद पेशेवर लोगाें का काम प्रतीत हो रहा है। सुरंग जीरो लाइन के ऐसे हिस्से से खोदी गई है, जहां पर आम लोगों को आने जाने की अनुमति पाकिस्तान की ओर से नहीं दी जाती है। यह दर्शाता है कि पाकिस्तानी रेंजरों, सेना और आईएसआई की मदद से इस सुरंग को तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से खोदा गया है। सुरंग की जांच में कुछ पाकिस्तानी बैग भी मिले हैं। हालांकि यह पुराने हैं।
शकरगढ़ और सियालकोट में लांचिंग पैड
कठुआ सांबा के महत्वपूर्ण ठिकाने और हाईवे साफ्ट टारगेट
हीरानगर। कठुआ और सांबा जिले में हाईवे से लेकर महत्वपूर्ण प्रतिष्ठान आतंकियों के निशाने पर रहे हैं। पूर्व में हीरानगर थाना, सांबा के महेश्वर सैन्य शिविर, राजबाग पुलिस थाना समेत जंगलोट सैन्य कैंप के नजदीक फिदाइन हमले पाकिस्तान की साजिशों की तस्दीक करते रहे हैं। बीएसएफ के आला अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर और पंजाब की सीमाओं से सटे इलाकों में लांचिंग पैड चलाए जा रहे हैं। शकरगढ़ और सियालकोट में आतंकी लांचिंग पैड सक्रिय हैं। जम्मू-कश्मीर के हाईवे से सटे सांबा, कठुआ जिले और महत्वपूर्ण संस्थान नजदीक हैं। ऐसे में ये टारगेट बनते हैं। सांबा और कठुआ जिले की सीमा काफी संवेदनशील है। पाकिस्तान ने जानबूझ कर जंगल और कुछ जमीनें अपनी सीमा के पास रखी हैं, जहां किसानों को भी नहीं जाने दिया जाता है। ऐसे में साफ है कि सोची समझी साजिश के तहत यह किया जा रहा है। बीएसएफ के अधिकारी ने कहा कि पांच से छह लांचिंग पैड वर्तमान में सियालकोट और शकरगढ़ में सक्रिय हैं।
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