-अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पाकिस्तान की गोलाबारी के बाद बंकरों की सफाई में जुटे लोग
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अरुण खजूरिया हीरानगर। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अरनिया सेक्टर में पाकिस्तान की गोलाबारी के बाद हीरानगर सेक्टर में भी ग्रामीण दहशत में हैं। यहां जीरो लाइन से सटे 22 गांवों के लोग फिर बंकर साफ करने में जुट गए हैं। फरवरी 2021 में संघर्ष विराम की घोषणा के दो साल आठ महीने बाद गोलीबारी से लोग सहम हुए हैं। बंकरों की जिस जिंदगी से मुक्ति मिली थी उन्हीं बंकरों को तैयार कर रहे हैं। शाम ढलने के बाद इन इलाकों से रेस्क्यू की जगह बंकर ही गोलाबारी से बचने का सहारा है।
सीमावर्ती निवासी रतन लाल ने कहा कि फरवरी 2021 में संघर्ष विराम समझौते से करीब दो दशक बाद कुछ राहत मिली थी। इससे जीवन में कई बदलाव हुए। लोग बिना डर के शाम ढलने के बाद घरों से बाहर घूमने लगे थे। किसान खेतों में जाना शुरू हुए थे। अब फिर पहले वाले हालात बन रहे हैं। पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा, सरकार उसी की भाषा में जवाब दे।
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गांव मनियारी के कुलदीप राज वर्मा ने कहा कि पाकिस्तान ने संघर्ष विराम का उल्लंघन कर साबित कर दिया है कि यह देश भरोसे लायक नहीं है। उसकी नापाक हरकतों से फिर सीमावर्ती दहशत में हैं। करीब ढाई वर्ष पहले संघर्ष विराम समझौते के बाद लोगों को बंकरों से छुटकारा मिला था। अब लगता है कि फिर वही जीवन व्यतीत करना पड़ेगा। बंकरों की सफाई शुरू कर दी है। न जाने कब पाकिस्तान इस इलाके में भी गोलीबारी शुरू कर दे।
गांव गंगू चक के रमेश चंद्र ने कहा कि गोलीबारी से सीमावर्ती लोगों पर फिर खतरा मंडराने लगा है। पाकिस्तान ने नापाक हरकतें शुरू कर दी हैं। किसान बेहद चिंतित हैं। दशकों बाद तारबंदी के आगे खेती शुरू हुई थी। अब फिर तारबंदी के आगे खेत बंजर होने के आसार दिख रहे हैं। बेहतर होगा कि केंद्र सरकार समय रहते पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब दे।