कठुआ। पब्लिक वेलफेयर फोरम ने उस आदेश की कड़ी निंदा की है जिसमें शिक्षकों और संस्थानों के प्रमुखों को लावारिस कुत्तों के प्रबंधन के लिए नोडल अधिकारी नामित करने के निर्देश दिए गए हैं। फोरम के अध्यक्ष अमरनाथ ठाकुर ने कहा कि यह आदेश शिक्षकों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला है और शिक्षण समुदाय का दुर्भाग्यपूर्ण दुरुपयोग है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन को शिक्षा मानकों को मजबूत करने, ढांचे को सुधारने और शैक्षिक चुनौतियों का समाधान करने पर ध्यान देना चाहिए, न कि शिक्षकों को ऐसे कार्य सौंपने चाहिए जिनका शिक्षण या अकादमिक विकास से कोई संबंध नहीं है।
क्योंकि शिक्षक राष्ट्र निर्माता हैं, न कि डॉग कैचर या आवारा कुत्तों की निगरानी करने वाले अधिकारी। यदि शिक्षकों को अप्रासंगिक और अपमानजनक कार्यों में उलझाया गया तो स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उम्मीद करना व्यर्थ होगा। यह आदेश प्रशासन की गलत प्राथमिकताओं और शिक्षण समुदाय के प्रति असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
ठाकुर ने मांग की कि ऐसे आदेश को तुरंत वापस लिया जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब नगरपालिकाएं, पशुपालन विभाग, स्थानीय निकाय और ग्रामीण विकास विभाग के पास प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद है तो शिक्षकों पर यह जिम्मेदारी क्यों डाली जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को केवल अपने मूल और पवित्र कर्तव्य बच्चों को पढ़ाने और उनका भविष्य संवारने पर ध्यान केंद्रित करने दिया जाए। उन्हें अतिरिक्त और गैर-शैक्षिक जिम्मेदारियों के बोझ से दबाया जाना न केवल शिक्षा को बाधित करता है बल्कि पूरे शिक्षण समुदाय का मनोबल भी गिराता है।
उन्होंने उप राज्यपाल प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग से अपील की है कि इस मामले पर संज्ञान लिया जाए, सुधारात्मक कदम उठाए जाएं और सुनिश्चित किया जाए कि शिक्षकों को उनके पेशेवर क्षेत्र से बाहर की जिम्मेदारियां न सौंपी जाएं। अगर इस दिशा में कदम नही उठाया जाता तो उनकी फोरम और वरिष्ठ नागरिक शिक्षकों के साथ खड़े हैं। क्योंकि शिक्षकों की गरिमा किसी भी हालत में समझौते योग्य नहीं है।